लंदन में रहने वाली हरियाणवी जाट गर्ल अनुराधा बेनीवाल 10 देश घूमने के बाद आज देश की बेटियों के लिए आजादी का ब्रांड बन गई है। देखिए, कैसे?
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देखिए, 10 देश घूमी जाट गर्ल कैसे बनी ‘आजादी का ब्रांड’?
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हरियाणा की इस बेटी ने न केवल देश की बेटियों को बिंदास लाइफ जीने का संदेश दिया, बल्कि साबित कर दिया कि यदि हौसलों में उड़ान है तो कोई डगर कठिन नहीं है। दुनिया के कई देशों में घूमकर बिंदास लाइफ जीने वाली अनुराधा अभी तक ब्लॉग लिखकर बेटियों को जागरूक करती थीं।
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अनुराधा बेनीवाल की पहली ‘आजादी मेरा ब्रांड’ की लांचिंग दिल्ली वर्ल्ड बुक फेयर में हुई। लांचिंग के साथ ही यह पुस्तक खासी चर्चाओं में आ चुकी है। अनुराधा बेनीवाल मूलरूप से महम खेड़ी गांव की रहने वाली हैं। दो बहनों में सबसे बड़ी अनुराधा 12वीं तक स्कूल में ही नहीं गई।
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अनुराधा के पिता उन्हें रेसलर या बॉक्सर बनाना चाहते थे, लेकिन अनुराधा चैस की नेशनल चैंपियन बन गईं। दुनिया में 38वीं रैकिंग के बावजूद अनु ने अलग करने की ठानी। फिलहाल वह लंदन में अनु चैस नाम से एकेडमी चला रही हैं। चैस खिलाड़ी होने के नाते अनुराधा शुरुआत से ही बिंदास रही।
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खेलों में भाग लेने के लिए अनुराधा को बाहर भी जाना पड़ता था। 2001 में पहली बार 16 वर्ष की उम्र में चैस वर्ल्ड चैंपियनशिप में भाग लेने वे स्पेन। बेफ्रिक होकर पहले देशभर में घूमी और फिर पेरिस, फ्रांस, ब्राजील, पोलैंड, बर्निंग, आस्ट्रिया हंगरी और स्विटजरलैंड आदि दस देशों में यात्रा की।
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178 पेजों में समेटी खुद की जिंदगी: यात्राओं के दौरान उन्होंने लड़कियों की जागरुकता के लिए ब्लॉग लिखने शुरू कर दिए। उनकी बिंदास लाइफ से प्रभावित होकर लेखक सत्यानंद ने उन्हें हिंदी में अनुभव लिखने के लिए राजी किया। इसके बाद अनु ने ‘आजादी मेरा ब्रांड’ नामक किताब लिखी।
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किताब के माध्यम से अनु लड़कियों को संदेश देना चाहती है कि घर से बाहर निकलकर भी सुरक्षित रह सकते हैं, बशर्ते हौसला और जज्बा हो। शादी की नहीं, पढ़ाई की चिंता होनी चाहिए। जरूरी नहीं है कि घर बैठकर ही सुरक्षित रह सकें। जीवन में नया करने के लिए घर से बाहर निकलना होगा।
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अनुराधा बताती हैं कि खिलाड़ी होने के नाते उन्हें परिवार से पूरा सहयोग मिला, जिस कारण वह आज इस मुकाम तक पहुंच सकी। 2011 में उनकी शादी अखिल से हुई। उनकी छोटी बहन आशु मुंबई यूनिवर्सिटी में पढ़ाई कर रही हैं। पिता अभी महम में ही रह रहे हैं।