एग्जिट पोल में मिले बहुमत से 'आप' की बांछे खिल गई थी लेकिन नतीजों ने तो पूरे झाड़ू को बिखेर कर रख दिया, देखिए आम आदमी पार्टी के हार की पांच वजह...
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kejriwal
- फोटो : File Photo
एग्जिट पोल में 'आप' को उम्मीद दिखी थी कि वो राज्य में सरकार बना लेगी, लेकिन अब उसे अगले पांच सालों के लिए विपक्ष में बैठना पड़ेगा। मौजूदा रूझानों में कांग्रेस की लहर स्पष्ट देखी जा रही है, जबकि अकाली हारते नजर आ रहे हैं। वहीं आम आदमी पार्टी झाड़ू के तिनकों की तरह बिखरी-बिखरी नजर आ रही है।
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दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल
- फोटो : file photo
आप के हालात तो इतने बुरे हैं कि उप मुख्यमंत्री सुखबीर बादल के गढ़ जलालाबाद में अपनी जीत का दावा करने वाले आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार भगवंत मान भी पीछे चल रहे हैं। बता दें कि भगवंत मान का कहना था कि वह सुखबीर बादल को बूरी तरह हराएंगे लेकिन यह तो अब आने वाला समय ही बताएगा कि जलालाबाद सीट किसके हाथों में होगी।
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- फोटो : File Photo
आम आदमी पार्टी की सरकार और उनके लगातार चले आ रहे केंद्र से टकराव के असर को भी पंजाब के लोगों ने देखा। पंजाब राज्य की सीमा पाकिस्तान से लगती है और ऐसे में दिल्ली के बाद यदि पंजाब में आप की सरकार बनती तो यहां पर आए दिन राज्य और केंद्र में टकराव देखने को मिलता। ये भी 'आप' के हार का एक बड़ा कारण हो सकता है।
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संजय सिंह
- फोटो : फाइल फोटो
आम आदमी पार्टी के हार के कारणों में एक कारण यह भी माना जा रहा है कि पार्टी के टिकट बटवारे से पार्टी कार्यकर्ता पूरी तरह से संतुष्ट नहीं थे। पार्टी में टिकट वितरण को लेकर सुच्चा सिंह से भी मतभेद हुए थे और उसके बाद फिर दूसरे नेताओं के चयन में भी विवाद हुआ। पार्टी कार्यकर्ताओं ने टिकट वितरण में केंद्रीय नेताओँ पर मनमानी करने का आरोप भी लगाया था।
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Sucha singh Chotepur
- फोटो : File Photo
इसके पार्टी को सुच्चा सिंह छोटेपुर का आम आदमी पार्टी से जुड़ना और फिर निकल जाना पार्टी के लिए काफी नुकसानदायक रहा है। बता दें कि 24 सीटों पर छोटेपुर की काट खोजने में केजरीवाल एंड पार्टी असफल रही। छोटेपुर पंजाब के माझा से ताल्लुक रखते हैं।
इसके अलावा आम आदमी पार्टी की हार के एक बड़ा कारण पंजाब को बाकी दो बड़े इलाके दोआबा और माझा में पार्टी के कमजोर संगठन का असर भी रहा है। आम आदमी पार्टी ने माझा इलाके पर ज्यादा ध्यान केंद्रित नहीं किया।