नोटबंदी के 50 दिन और न दिन को सुकून न रात को नींद। कभी बैंक में चक्कर तो कभी एटीएम की लाइन। ऊपर से हो गए कई बड़े नुकसान। हालात पर एक नजर।
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एटीएम के बाहर लगी लाइन
नोटबंदी से सोने के और लग्जरी आइटमों के कारोबार में मंदी आई है। नोटबंदी के 50 दिन बाद व्यापारियों का धंधा मंदा ही है। सोने के कारोबार में सिर्फ 10 प्रतिशत का ही सुधार हुआ है। ज्वेलर्स एसोसिएशन के महासचिव संजय सहगल का कहना है कि 50 दिन गुजर जाने के बावजूद लोगों के पास कैश नहीं है। स्वैप मशीनें हैंग करने की दिक्कत भी आ रही हैं। शादियों का सीजन होने के बावजूद आभूषण विक्रेताओं के पास कारोबार नहीं है।
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होटल इंडस्ट्री पर असरः सेक्टर-43 स्थित मेट्रो होटल के संचालक बलजिंदर सिंह का कहना है कि उनकी इंडस्ट्री पर नोटबंदी का असर पड़ा है। उनका कहना है जिसने शादी पर 10 लाख का खर्चा करना है अब वह 5 लाख का खर्चा कर रहा है। उनका कहना है सिस्टम पूरी तरह से कैशलेस नहीं हो सकता।
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आधा रह गया फर्नीचर बाजारः शादियों का सीजन होने के बावजूद फर्नीचर कारोबार मंदा है। सेक्टर-54 की फर्नीचर मार्केट में व्यापारी अशोक कुमार का कहना है कि 50 प्रतिशत फर्नीचर का कारोबार ही रह गया है। स्वैप मशीनें नहीं मिल रहीं हैं, जबकि आवेदन किए हुए एक माह से ज्यादा का समय हो गया है। बैंक की ओर से बताया जाता है कि मशीनें आउट ऑफ स्टाक हैं।
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2000 का नोट तोड़ना मुश्किलः सेक्टर-17 के ब्रडीज चिकन के प्रबंधक विनय सिंह का कहना है कि नोटबंदी का असर कारोबार पर पड़ा है। 30 प्रतिशत कारोबार प्रभावित हुआ है। यही नहीं अब हर कोई दो हजार रुपये का नोट लेकर आ रहा है उसे तोड़ना काफी मुश्किल हो रहा है। बैंक को कई दिनों से स्वैप मशीन देने के लिए आवेदन किया हुआ है, लेकिन अभी तक मशीन नहीं लगी है।
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कपड़े का कारोबार ठपः व्यापार मंडल के चेयरमैन चरणजीव सिंह का कहना है कि इन 50 दिन में व्यापारियों का करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ है लेकिन अभी भी कारोबार 60 से 70 प्रतिशत ही हो रहा है जबकि पूरी तरह से पहले जैसा कारोबार होने में अभी दो से तीन माह लगने की उम्मीद है। कपड़े का कारोबार अब भी 30 प्रतिशत प्रभावित हो रहा है। करियाना और सब्जी के कारोबार में अब कोई फर्क नहीं है।
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ट्रांसपोर्टर गाड़ियों की किस्त नहीं दे पा रहेः एलसीवी ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन चंडीगढ़ के उपाध्यक्ष अजय कुमार सिंह कहते हैं कि सरकार ने यदि नोटबंदी पर जल्द सही तरीके से काम नहीं किया तो ट्रांसपोर्टर बर्बाद हो जाएंगे। गाड़ियों की किस्तें भरना मुश्किल हो रहा है। दस दिन यही स्थित और रही तो बहुत मुश्किल हो जाएगी। नोटबंदी ने व्यापार की कमर तोड़कर रख दी है।
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इंडस्ट्री पर बड़ा असर: इंडस्ट्री पर भी नोटबंदी का 25-30 फीसदी तक असर पड़ा है। बात चाहे मैन्यूफैक्चिरिंग की हो, होटल की या अन्य इंडस्ट्री की। उद्यमियों को भी शुरुआत में थोड़ी बहुत परेशानी हुई है। हालांकि अब इंडस्ट्री पहले की तरह सामान्य है। जहां पहले कैश में अधिक डील होती थीं, वहीं अब चेक या अन्य माध्यमों से अधिक डील हो रही है। उद्यमियों के अनुसार अभी हालात सामान्य हैं, लेकिन इंडस्ट्री को ग्रोथ 31 मार्च के बाद से ही मिलेगी।
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मंदिर भी अछूते न रहेः नोटबंदी से मंदिर में चढ़ावा कम हो गया है। शिरडी साईं मंदिर में चढ़ावे में भारी कमी आई है। हर महीने औसतन यहां तीस लाख का चढ़ावा गोलक में आता था। अभी रविवार 25 दिसंबर को खुले गोलक में 23 लाख रुपये ही चढ़ावा आया है। इसके अलावा दस लाख रुपये मंदिर में दान के रूप में आते थे। इसकी बाकायदा पर्ची काटी जाती है, इस बार यह पर्ची ढाई लाख रुपये की ही कटी है।
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मस्जिदों में भी कम हुई दानराशिः नोटबंदी के बाद मस्जिदों में भी दानराशि में 30 प्रतिशत से अधिक की कमी आई है। सेक्टर-26 स्थित नूरानी मस्जिद के मुफ्ती मोहम्मद अनस कासमी ने बताया कि हर शुक्रवार को नमाज के बाद लोग मस्जिद में दान करते थे। अब नोटबंदी के बाद उसमें काफी कमी आई है।
बिल्डर एसोसिएशन, पीरमुछल्ला (जीरकपुर) के अध्यक्ष विजय अरोड़ा कहते हैं कि नोटबंदी के बाद अभी एंड यूजर्स केंद्र सरकार की ओर से भविष्य में होने वाली ब्याज दरों में कटौती का इंतजार करने में लग गए हैं। जिसके चलते प्रापर्टी बाजार में फिलहाल मंदी का दौर है। हालांकि यह ज्यादा समय तक नहीं रहने वाला। रियल एस्टेट कारोबारियों को अधिक लाभ होगा, लेकिन कुछ समय के लिए धैर्य रखने की जरूरत है।