25 साल की एमबीए गरिमा दुल्हन की तरह सजी, धूमधाम से समारोह में गई और बैरागन बन गई। देखिए तस्वीरें।
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दुल्हन बनी, सजकर गई... और बन गई बैरागन
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हरियाणा के सिरसा जिले में डबवाली की रहने वाली गरिमा का दीक्षांत समारोह धूमधाम से संपन्न हुआ। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर डबवाली के इतिहास में महिला त्याग का नया अध्याय जुड़ा।
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हजारों लोगों की उपस्थिति में संसारिक सुख-सुविधाओं का त्याग करके शहर की पच्चीस वर्षीय बेटी गरिमा जैन को साध्वी निवेदिका का नया नाम मिला।
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एमबीए और अंग्रेजी भाषा में एमए करने वाली गरिमा जैन भगवती दीक्षा ग्रहण करने से पहले लोगों से रूबरू हुई। लोगों से सीधा संवाद करते हुए उनके प्रश्नों के जवाब दिए।
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गरिमा से पूछा गया कि उसने वैराग्य जीवन क्यों अपनाया? माता-पिता का दिल कैसे जीता? तमाम सवालों का जवाब हजारों लोगों को दिया। जवाब सुनकर लोगों ने दांतों तले अंगुली दबा ली।
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अनाज मंडी में गरिमा जैन का दीक्षा समारोह धूमधाम तथा हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ। दुल्हन की तरह सजी बेटी की शोभा यात्रा देखकर शहर वासियों की आंखे फटी की फटी रह गई।
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दीक्षा स्थल पर पहुंचकर बेटी ने संसारिक चोले को उतारकर भगवा चोला पहन लिया। जैन संतों से दीक्षा लेने के बाद वह गुरुवर के साथ चली गई। समारोह में पंजाब, हरियाणा, राजस्थान के जैन श्रद्धालुओं ने भाग लिया।
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सुबह करीब साढ़े आठ बजे एसएस जैन सभा से शोभा यात्रा की शुरुआत हुई। जैन श्रद्धालुओं की भारी तादाद के बीच दुल्हन के लिबास में गरिमा जैन फूलों से सजे चार घोड़ों वाले रथ में सवार हुई।
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शोभायात्रा के आगे-आगे बैंड पार्टी चल रही थी। इसके ठीक पीछे लुधियाना से आए गजराज चल रहे थे। गजराज के पीछे दो घोड़ों वाले रथ में सवार गरिमा की माता संगीता और पिता निर्मल जैन सवार थे।
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शोभा यात्रा में भगवान श्री कृष्ण तथा महावीर स्वामी के जीवन पर आधारित झांकियां शामिल थी। ढोल की थाप पर नाचते हुए लोग आगे बढ़ रहे थे।
शोभा यात्रा मुख्य बाजार, कालोनी रोड़, चौटाला रोड़ से होती हुई अनाज मंडी में दीक्षा स्थल पर पहुंची। इससे पूर्व शहर में विभिन्न जगहों पर पुष्प वर्षा करके गरिमा का स्वागत हुआ।