दिल्ली की 'निर्भया' के साथ चलती बस में जैसी दरिंदगी हुई, वैसी ही दरिंदगी इस युवती के साथ हुई थी। दोनों मामलों में कई समानताएं थीं, डालिए एक नजर।
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दिल्ली में 16 दिसंबर 2012 को निर्भया से गैंगरेप हुआ। 29 दिसंबर 2012 को निर्भया की सिंगापुर में मौत हो गई। 3 जनवरी 2013 को कोर्ट में चालान पेश किया गया और 7 जनवरी 2012 को कोर्ट में ट्रायल शुरू हो गया। 2 फरवरी, 2013 : दिल्ली पुलिस ने शेष पांच आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया। सितंबर 2013 में चार को फांसी की सजा सुनाई गई।
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गैंगरेप केस
रोहतक रेप केस में एक फरवरी में युवती घर से गायब हुई। चार फरवरी को नग्न अवस्था में उसका शव मिला। 21 जुलाई 2015 को पुलिस ने कोर्ट में चार्जशीट पेश की। 3 सितंबर पुलिस ने दो महीने बाद कोर्ट में सप्लीमेंटरी चालान पेश किया। 15 अक्तूबर पहली गवाही हुई। 9 दिनों तक गवाहियों का दौर चला। 30 नवंबर 2015 को गवाही पूरी। 1 से 7 दिसंबर तक आरोपियों के 313 के बयान दर्ज किए गए। दिसंबर 2015 में सातों को फांसी
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समानताएं: चाहे दिल्ली रेप केस हो या रोहतक रेप केस। दोनों मामलों में मुख्य समानता यही थी कि वारदातों को बेहद घिनौने तरीके से अंजाम दिया गया था। रेप के बाद आरोपी इतनी बेदर्दी से पीड़िताओं के साथ पेश आए, ये सोचकर भी दिल दहल जाता है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से दोनों की ये पुष्टि हुई।
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दिल्ली रेप केस में एक नाबालिग समेत 6 लोगों पर युवती से रेप और हत्या के आरोप लगे। रोहतक में एक नाबालिग समेत 9 लोगों पर रेप और हत्या के आरोप लगे। दोनों मामलों में एक आरोपी नाबालिग है। दिल्ली केस का नाबालिग बरी हो चुका है।
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फास्ट ट्रैक कोर्ट ने दिल्ली रेप केस में पांच लोगों पर हत्या, गैंगरेप और मामलों में आरोप तय किए। इनमें से 11 मार्च 2013 को आरोपियों में से एक राम सिंह ने तिहाड़ जेल में फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली। रोहतक केस के एक आरोपी ने भी जहर निगलकर जान दी।
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दिल्ली रेप केस के चारों आरोपियों (नाबालिग को छोड़कर) को फांसी की सजा सुनाई गई थी। नाबालिग आरोपी को 31 अगस्त 2013 को तीन साल की सजा मिली थी। रोहतक रेप केस के सभी आरोपियों (नाबालिग को छोड़कर) को फांसी की सजा सुनाई गई है।
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मुख्य अंतर: दिल्ली रेप केस में फास्ट ट्रेक कोर्ट में आरोपियों को करीब 6 महीने बाद दोषी करार देकर सजा सुनाई थी, जबकि इसके मुकाबले में रोहतक रेप केस में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश सीमा सिंघल की अदालत ने 3 महीने से भी कम समय से आरोपियों को दोषी करार दे दिया।
दिल्ली रेप केस के आरोप में 7 लोगों को नामजद किया गया था, जबकि रोहतक रेप केस में इससे भी ज्यादा आरोपी शामिल थे। मामले में 9 लोगों को आरोपी बनाया गया। दिल्ली रेप केस सामने आने के बाद देशभर में प्रदर्शन हुए, जबकि रोहतक रेप सामने आने के बाद हरियाणाभर में प्रदर्शन हुए।