देश जिस गति से डिजिटलीकरण की दिशा में आगे बढ़ रहा है, उतनी ही तेजी से साइबर धोखाधड़ी के मामले भी बढ़ रहे हैं। पिछले कुछ वर्षों में आम लोगों के साथ कॉरपोरेट भी इसके शिकार हुए हैं।आज जालसाजों से अपनी गाढ़ी कमाई को बचाना बड़ी चुनौती बन गया है। हममें से ज्यादातर लोग अपने कंप्यूटर और स्मार्टफोन से ही नहीं बल्कि ऑफिस कंप्यूटर और सार्वजनिक वाईफाई के जरिए भी वित्तीय लेनदेन करते हैं। अलग-अलग उपकरणों से निजी जानकारियों तक पहुंच से हम तमाम तरह के जोखिमों के संपर्क में आ जाते हैं। सुरक्षा के तमाम उपाय के बावजूद हैकर्स साइबर धोखाधड़ी के नए-नए तरीके अपना रहे हैं। इसे देखते हुए साइबर बीमा की महत्ता बढ़ गई है, जिसे बड़ी-छोटी कंपनियों के साथ आम लोगों को भी जरूर लेना चाहिए।
ऐसे जोखिमों से मिलती है सुरक्षा
साइबर बीमा विभिन्न प्रकार के साइबर जोखिम से सुरक्षा देता है। इनमें आईडेंटिटी चोरी, सोशल मीडिया लायबिलिटी, साइबर स्टॉकिंग, मालवेयर अटैक, आईटी चोरी से नुकसान और साइबर एक्सटॉर्शन आदि शामिल हैं। यह ई-मेल स्पूफिंग और फिशिंग से होने वाले नुकसान को भी कवर करता है। कुछ कंपनियों का मानना है कि साइबर बीमा महंगा हो सकता है, लेकिन इसकी प्रीमियम दरें बहुत प्रतिस्पर्धी हैं। आपको एक लाख रुपये का साइबर बीमा लेने के लिए सालाना 600-800 रुपये खर्च करने पड़ सकते हैं।