इस तरह मिलेगी आयकर छूट
गोल्ड बॉन्ड की परिपक्वता अवधि आठ साल की होती है और इस पर सालाना 2.5 फीसदी का ब्याज मिलता है। बॉन्ड पर मिलने वाला ब्याज निवेशक के टैक्स स्लैब के अनुरूप कर योग्य होता है, लेकिन इस पर स्रोत पर कर कटौती (टीडीएस) नहीं होती है। अगर बॉन्ड को तीन साल बाद और आठ साल की परिपक्वता अवधि के पहले बेचा जाता है तो इस पर 20 फीसदी की दर से लांग टर्म कैपिटल गेन (एलटीसीजी) टैक्स लगेगा, लेकिन परिपक्वता अवधि के बाद बेचने पर मिलने वाला ब्याज करमुक्त रहेगा।
लगातार बढ़ रही है सोने की कीमत
सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड स्कीस के निवेशकों को एक वित्तीय वर्ष में अधिकतम 500 ग्राम सोने के बॉन्ड खरीदने की ही अनुमति है। वहीं न्यूनतम निवेश एक ग्राम का होना जरूरी है। सरकार ने बजट में सोने पर आयात शुल्क 10 फीसदी से बढ़ाकर 12.5 फीसदी कर दिया है। साथ ही वैश्विक स्तर पर बढ़ी लिवाली से सोने की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं।