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केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी बोले: नौ राज्यों ने पेट्रोल-डीजल पर जनता को नहीं दी कोई राहत, सरकार हरसंभव कोशिश कर रही

Mon, 14 Mar 2022 09:56 PM IST
अभिषेक दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

पुरी ने अमेरिका, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, ब्रिटेन, स्पेन और भारत का तुलनात्मक डाटा पेश करते हुए कहा कि इन देशों में कोरोना महामारी के दौरान 50 से 55 प्रतिशत मूल्य बढ़े, लेकिन भारत में सिर्फ 5 प्रतिशत वृद्धि हुई।
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हरदीप पुरी - फोटो : अमर उजाला
देश के नौ राज्यों ने पेट्रोल और डीजल वैट में कोई कटौती नहीं की जिसके कारण वहां जनता को महंगी दरों पर इन्हें खरीदना पड़ रहा है। केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने सोमवार को राज्यसभा में बताया कि केंद्र सरकार ने नवंबर 2021 में केंद्रीय उत्पाद कर में कटौती की लेकिन महाराष्ट्र और केरल समेत नौ राज्यों ने वैट की दरों में कोई कटौती नहीं की। 

इसके साथ ही पुरी ने अमेरिका, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, ब्रिटेन, स्पेन और भारत का तुलनात्मक डाटा पेश करते हुए कहा कि इन देशों में कोरोना महामारी के दौरान 50 से 55 प्रतिशत मूल्य बढ़े, लेकिन भारत में सिर्फ 5 प्रतिशत वृद्धि हुई। उन्होंने  कहा, हमें इसके लिए खुश होना चाहिए लेकिन इसके बदले हमें ये सुनना पड़ा कि दाम क्यों बढ़ रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि देश में 1 अप्रैल 2020 से 21 मार्च 2021 तक पेट्रोल के मूल्य स्थिर रहे थे।

भाजपा के एक सदस्य के पूरक प्रश्न के जवाब में उन्होंने कहा कि महामारी के दौरान स्थिति के अनुसार कर बढ़ाए गए, लेकिन उसके बाद उसमें कटौती की गई। हमने टैक्स घटाए लेकिन कुछ राज्यों ने ऐसा नहीं किया। उन्होंने कहा, हम आज भी मूल्यों को नियंत्रित रखने के लिए कदम उठाने के लिए तैयार हैं।  
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पेट्रोल-डीजल के दाम - फोटो : अमर उजाला
इन राज्यों ने नहीं घटाया वैट
देश में महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, केरल, झारखंड, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में पेट्रोलियम पदार्थों की दर बेहद ऊंची है। ये सभी गैर भाजपा शासित राज्य हैं, जिन्होंने केंद्रीय कर में कटौती के बाद भी वैट की दरों में कमी नहीं की।

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गोरखपुर में पेट्रोल डीजल के दाम। - फोटो : अमर उजाला।
रूस से रियायती मूल्य पर तेल खरीदने का प्रस्ताव
रूस द्वारा कच्चे तेल पर मूल्य में छूट देने के प्रस्ताव के बारे में उन्होंने कहा कि पिछले दो साल की महामारी और अभी रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध की स्थिति में सरकार सभी उपलब्ध विकल्पों पर विचार कर रही है। जब सरकार किसी निष्कर्ष पर पहुंचेगी तब सदन को इस बारे में सूचित करेगी। पुरी ने दोहराया कि पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतों को 2010 और 2014 में नियंत्रण से बाहर कर दिया गया था और इनकी कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार के अनुसार तय होती हैं। उन्होंने लिखित जवाब में बताया कि सरकार ने अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने और गरीबों और मध्य वर्ग को राहत देने के लिए 4 नवंबर 2021 को पेट्रोल और डीजल पर सेंट्रल एक्साइज की दर में 5 और 10 रुपयों की कटौती की थी।

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कांग्रेस नेता आनंद शर्मा - फोटो : twitter.com/AnandSharmaINC
राज्य इसे जीएसटी के दायरे में नहीं लाना चाहते
कांग्रेस सांसद आनंद शर्मा ने कहा कि जीएसटी लागू करते समय केंद्र और राज्य इस बात पर सहमत थे कि पेट्रोलियम उत्पादों को बाद में इसके दायरे में लाया जाएगा। इस दिशा में क्या प्रगति हुई है? इस पर पुरी ने कहा कि पेट्रोलियम और शराब ये दो चीजें राज्यों के लिए राजस्व का बड़ा स्रोत हैं और राज्य सरकारें इन्हें अपने हाथ से नहीं जाने देना चाहती। इसलिए जीएसटी काउंसिल में इस बारे में सहमति नहीं बन सकी है।
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राज्यसभा के सभापति वेंकैया नायडू - फोटो : संसद टीवी
संसद की आठ स्थायी समितियों ने 73 घंटे से ज्यादा किया काम
उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने अनुदान मांगों पर चर्चा करने वाली स्थायी समितियों के प्रयास की सराहना की है। उन्होंने सोमवार को कहा स्थायी समितियों ने वर्ष 2022-23 के लिए विभिन्न मंत्रालयों की अनुदान मांगों की सघन जांच की है। संसद की ऐसी आठ स्थायी समितियों ने 73 घंटे 33 मिनट काम किया। समितियों ने 21 बैठकों को अंजाम दिया। 

इन बैठकों में 32 विभागों  पर चर्चा की गई और 18 मंत्रालयों की अनुदान मांगों की जांच की गई। 21 बैठकों का औसत समय साढ़े तीन घंटे रहा। पिछले सालों की बैठकों की तुलना में यह  एक घंटे 17 मिनट ज्यादा है। हालांकि सभापति ने बैठकों में सदस्यों की घटती उपस्थिति पर चिंता व्यक्त की।  उन्होंने आठ समितियों के अध्यक्षों के संग उनके पिछले पांच साल के कामकाज पर एक और बैठक करने का प्रस्ताव भी रखा।
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जल जीवन मिशन - फोटो : social media
22 राज्यों में 9.45 लाख जल निकाय  
जल शक्ति मंत्रालय द्वारा की गई जल निकायों की गणना में 22 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में कुल 9.45 लाख जल निकाय हैं। सोमवार को राज्यसभा में एक सवाल के जवाब में जल शक्ति राज्यमंत्री विश्वेश्वर टुडु ने बताया, देश में सबसे ज्यादा अतिक्रमण तमिलनाडु  के जल निकायों पर है। यहां ऐसे निकायों की संख्या 8336 है। दूसरे नंबर पर आंध्रप्रदेश है। यहां 3920 निकायों पर अतिक्रमण है। इसके बाद तेलंगाना में 3,032 जल निकायों पर अतिक्रमण है। 8 जनवरी 2022 तक 1591 जल निकायों को पुनर्जीवित करने का काम पूरा हो चुका है।
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