फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कभी दुनिया को हम बेचते थे प्याज, आज ऐसे आई बाहर से खरीदने की नौबत

Mon, 09 Dec 2019 12:51 PM IST
‌डिंपल अलवधी बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
विज्ञापन
प्याज की बेकाबू कीमतें - फोटो : Amar Ujala
विज्ञापन

सरकार प्याज की घरेलू आपूर्ति बढ़ाने और कीमतों में कमी लाने के लिए तमाम कोशिशें कर रही है। पिछले सप्ताह खाद्य एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्री राम विलास पासवान ने सार्वजनिक क्षेत्र की विपणन कंपनी एमएमटीसी को एक लाख टन प्याज का आयात करने का निर्देश दिया था। इसके साथ ही भारत अब प्याज निर्यातक से आयातक बन गया है। 

विज्ञापन


क्यों बढ़े प्याज के दाम?

इस साल मई के बाद प्याज की कीमतों में काफी इजाफा हुआ है। बीते साल प्याज का बहुत कम उत्पादन हुआ था। इस बार भी बाढ़ और बारिश की वजह से उत्पादन कम हुआ है, जिसकी वजह से इसमें बढ़ोतरी देखने को मिल रही है।  इसके अतिरिक्त कारोबारियों ने सरकार की प्रतिकूल नीतियों को इसका जिम्मेदार ठहराया है।

लासलगांव की कृषि उपज विपणन समिति (एपीएमसी) के अध्यक्ष जयदत्त होल्कर ने कहा कि अक्तूबर और नवंबर में बेमौसम वर्षा हुई है, जिसकी वजह से खरीफ सीजन में बोई गई फसलों को नुकसान हुआ है। आंध्र प्रदेश और कर्नाटक सहित दक्षिण भारतीय राज्यों में बोई गई शुरुआती किस्म की प्याज आवक को नुकसान पहुंचा है। यही कारण है, जिसकी वजह से बाजार में नई किस्म की प्याज आपूर्ति नहीं है। 

प्याज की सबसे ज्यादा खेती महाराष्ट्र में होती है। भारत में प्याज के कुल उत्पादन का 35 फीसदी प्याज महाराष्ट्र से आता है। सितंबर माह से मध्य प्रदेश, राजस्थान और गुजरात में हो रही बेमौसम बारिश से फसल को नुकसान पहुंचा है। 

16 नवंबर 2019 तक लासलगांव मार्केट में एक साल में इतना रहा प्याज का दाम
 
महीना प्रति कुंतल प्याज का दाम
जनवरी 2019 531 रुपये
फरवरी 2019 421 रुपये
मार्च 2019 580 रुपये
अप्रैल 2019 830 रुपये
मई 2019 931 रुपये
जून 2019 1,222 रुपये
जून 2019 1,252 रुपये
अगस्त 2019 1,880 रुपये
सितंबर 2019 3,291 रुपये
अक्तूबर 2019 3,112 रुपये
नवंबर 2019 4,379 रुपये

ये कदम उठा चुकी है सरकार

  • सरकार कारोबारियों पर स्टॉक लिमिट लगा चुकी है, जिससे जमाखोरी रोकी जा सके।
  • इसके अलावा लोगों को राहत देने के लिए सरकार 23.40 रुपये प्रति किलो की दर से प्याज बेच रही है।
  • सरकार अपने बफर स्टॉक में से 57,000 टन प्याज निकाल चुकी है।
  • जून में सरकार द्वारा निर्यातकों को दी जाने वाली 10 फीसदी की सब्सिडी समाप्त कर दी गई थी। 
विज्ञापन

हाल में किया गया था ये बदलाव

सरकार ने सितंबर के पहले हफ्ते में ही एमएमटीसी को टेंडर के जरिए 2,000 टन का प्याज आयात करने का आदेश दिया गया था।  यह अनुमान है कि लगभग 2,000 से 4,000 टन प्याज मुंबई बंदरगाह में पहुंचेगा। अगले कुछ दिनों में इसके बाजारों में पहुंचने की उम्मीद है। पासवान की नवीनतम घोषणा में प्याज के आयातक से लेकर निर्यातक तक भारत की स्थिति में बदलाव का संकेत है। 

अफगानिस्तान, संयुक्त अरब अमीरात और मिस्र मुख्य बाजार हैं जहां से भारत प्याज आयात करता है। हालांकि घरेलू व्यापारियों का कहना है कि बाजारों में ऐसे प्याज का स्वागत नहीं किया जाता है। व्यापारी यह भी बताते हैं कि आयातित प्याज का नई फसल की कीमतों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

तीन चक्रों में उगता है प्याज

  • गर्मियों या खरीफ की फसल (अप्रैल-जून में बुवाई) अक्तूबर के मध्य से बाजारों में आती है। 
  • देर से खरीफ की फसल (सितंबर में बुवाई) जनवरी से मार्च तक बाजार में आती है। 
  • सर्दियों या रबी फसल (अक्तूबर और नवंबर के बीच उगाई गई) मार्च और अप्रैल के दौरान बाजारों में पहुंचती है।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें