जीएसटी सुधार
- फोटो : Amar Ujala Print
बीमा प्रीमियम
15 फीसदी तक होगी बचत, बढ़ेगी इंश्योरेंस पहुंच
जीएसटी परिषद का व्यक्तिगत स्वास्थ्य और जीवन बीमा प्रीमियम पर टैक्स 18 फीसदी से घटाकर शून्य करने का फैसला देश में तेजी से इंश्योरेंस की पहुंच बढ़ाने में मददगार होगा। इस कदम से न सिर्फ व्यक्तियों और परिवारों के लिए बीमा अधिक सस्ता हो जाएगा, बल्कि प्रीमियम का बोझ भी 15 फीसदी तक कम हो जाएगा। साथ ही, 2047 तक सबको बीमा मुहैया कराने का सरकार का लक्ष्य भी पूरा होगा। जीएसटी परिषद की 56वीं बैठक में लिए गए फैसले के तहत 22 सितंबर, 2025 से सभी तरह की व्यक्तिगत जीवन बीमा पॉलिसी और उनके पुनर्बीमा पर कोई जीएसटी नहीं लगेगा। इनमें टर्म लाइफ, यूलिप और एंडोमेंट प्लान शामिल हैं। सभी व्यक्तिगत स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी और उनके पुनर्बीमा को भी जीएसटी के दायरे से बाहर कर दिया गया है। इनमें फैमिली फ्लोटर और वरिष्ठ नागरिकों की स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी शामिल हैं।
वर्तमान में, अगर आधार प्रीमियम 2,000 रुपये है, तो 18 फीसदी जीएसटी जोड़ने के बाद कुल भुगतान 2,360 रुपये बनता है। यानी जीएसटी के रूप में 360 रुपये का अतिरिक्त भुगतान करना पड़ता है। अब जीएसटी शून्य होने से सिर्फ आधार प्रीमियम का ही भुगतान करना होगा, जिससे बीमा अधिक किफायती होगा।
15,000 रुपये के प्रीमियम पर अब 2,700 की बचत
अगर कोई व्यक्तिगत पॉलिसीधारक अभी 18 फीसदी जीएसटी के साथ 15,000 रुपये का प्रीमियम चुकाता है, तो जीएसटी 2.0 के तहत उसका खर्च 18 फीसदी कम हो जाएगा। इसका मतलब है कि नया प्रीमियम 12,300 रुपये होगा, जिससे पॉलिसीधारक को 2,700 रुपये की बचत होगी।
उपभोक्ताओं तक लाभ पहुंचाएं कंपनियां
हम यह सुनिश्चित करेंगे कि बीमा कंपनियां जीएसटी से दी गई राहत का लाभ उपभोक्ताओं को दें। हम चाहते हैं कि बीमा आम आदमी के लिए किफायती बने। देश में इसकी कवरेज का विस्तार हो।
निर्मला सीतारमण, केंद्रीय वित्त मंत्री