समाचार पत्र प्रकाशकों की मांग
- समाचार पत्र प्रकाशकों ने सरकार से न्यूजप्रिंट पर लागू पांच फीसदी का आयात शुल्क हटाने की मांग की है।
- इंडियन न्यूजपेपर सोसायटी (आईएनएस) ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को बजट से पहले सौंपे ज्ञापन में अखबारी कागज के आयात पर सीमा शुल्क कटौती, उद्योग को प्रोत्साहन पैकेज या कम से कम 50 फीसदी बढ़े शुल्क के साथ विज्ञापन जारी करने का आग्रह किया है।
पर्यटन व आतिथ्य क्षेत्र
- भारतीय पर्यटन और आतिथ्य के संघों के महासंघ (एफएआईटीएच) ने देशभर में पर्यटन को उद्योग का दर्जा देने के लिए कहा है।
- महासंघ के कार्यवाहक सीईओ आशीष गुप्ता ने कहा था कि, 'एफएआईटीएच के सदस्य सामूहिक रूप से सरकार के विभिन्न सदस्यों के संपर्क में हैं और उन्हें आम बजट में उचित राहत मिलने की उम्मीद है।' उन्होंने कहा कि एफएआईटीएच ने पर्यटन क्षेत्र के लिए कई तरह की कर राहत की सिफारिश भी की है, जिसमें निर्यात आय को कर मुक्त बनाने और और भारत में यात्रा करने पर आयकर छूट दिए जाने की बात शामिल है।
कृषि क्षेत्र
- सरकार कृषि क्षेत्र के लिए हर साल कर्ज का लक्ष्य बढ़ाती रही है और इस बार भी 2021-22 के लिए लक्ष्य को बढ़ाकर करीब 19 लाख करोड़ रुपये किया जा सकता है। चालू वित्त वर्ष के लिए सरकार ने कृषि ऋण का लक्ष्य 15 लाख करोड़ रुपये रखा है।
- वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2020-21 का बजट पेश करते हुए कहा था कि, 'कृषि क्षेत्र को कर्ज देने के मामले में गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां (एनबीएफसी) और सहकारी बैंक सक्रिय रहे हैं। राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) पुनर्वित्त योजना का आगे और विस्तार किया जाएगा। वित्त वर्ष 2020-21 के लिये कृषि कर्ज का लक्ष्य 15 लाख करोड़ रुपये रखा गया है।'
रेस्तरां व खाद्य डिलीवरी क्षेत्र
- रेस्तरां व खाद्य डिलीवरी क्षेत्र ने होम डिलीवरी पर माल एवं सेवा कर (जीएसटी) की दरें मौजूदा 18 फीसदी से घटाकर पांच फीसदी करने की मांग की है। उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने कहा कि तीन अरब डॉलर के इस क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिये जीएसटी दर को तार्किक बनाना आवश्यक है।
- फूजा फूड्स के संस्थापक एवं प्रबंध निदेशक दिब्येंदू बनर्जी ने कहा कि, 'भारत में ऑनलाइन फूड डिलीवरी क्षेत्र काफी तेज गति से आगे बढ़ रहा है। यह अभी 2.94 अरब डॉलर का है और 22 फीसदी की सालाना दर से बढ़ रहा है। हालांकि, कर संबंधी जटिलताओं के चलते वृद्धि की राह में अवरोध उत्पन्न हो रहे हैं।