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नोटबैनः पीएम मोदी के मास्टरस्ट्रोक से होंगे ये 5 बड़े फायदे

Wed, 16 Nov 2016 12:43 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
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बैंक के बाहर लगी लाइन - फोटो : amar ujala
500 और 1000 के पुराने नोट पर बैन और नए नोट जारी करने के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फैसले की देशभर में समीक्षा की जा रही है। कई लोग इसे केवल राजनीतिक कदम मान रहे हैं तो ऐसे लोगों की भी कमी नहीं है जो मानते हैं कि यह फैसला देश की आर्थिकी के लिए मास्टर स्ट्रोक साबित होगा। आइए 5 बिंदुओं में जानते हैं कि देश की अर्थव्यवस्था के लिए यह फैसला कैसे फायदेमंद होगा...

 
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bank
1- बैंकों का डिपोजिट बेस बढ़ेगा
देश की अर्थव्यवस्था में बड़ी मात्रा में कैश बैंकों और निवेश  से बाहर है। जानकार मानते हैं कि करीब 4500 अरब रुपए लोगों के पास जमा हैं जोकि अपने आप में एक समांनांतर अर्थव्यवस्था की तर है। ऐसे में अगर इस पैसा का एक हिस्सा भी बैंकों तक पहुंचता है तो इससे उनका डिपोजिट बेस बढ़ेगा और लोगों की बचत भी।
 
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RBI
2- घट सकती है ऋण देना
बैंकों के पास बड़ी मात्रा में पैसा आएगा तो इससे उनकी ऋण देने की क्षमता बढ़ेगी। उच्च CASA (करेंट अकाउट/सेविंग्स अकआउंट) डिपोजिट के चलते जनता को सस्ती दरों पर ऋण मिल सकेगा। उम्मीद की जा सकती है कि अगले 6 महीनों के भीतर बैंक लेंडिंग रेट घटा सकता है।

 

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आरबीआई गवर्नर उर्जित पटेल (फाइल फोटो)
3- मौद्रिक नीति के लिहाज से अहम
आने वाले दिनों में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया मौद्रिक नीति में उदारता बरत सकता है। इकॉनोमी में कैश आने के बाद आरबीआई के लिए मौद्रिक नीति तय करने में थोड़ी आसानी होगी और वह थोड़ा रिस्क ले सकता है। आर्थिक जानकार मान रहे हैं कि 2017-18 में आरबीआई रेपो रेट 100 bps घटा सकता है।
 
 
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जनधन योजना
4- जनधन के माध्यम से वित्तीय समावेशन
पिछले दो सालों में सरकार ने जनधन योजना के तहत बड़ी संख्या में बैंक खाते खुलवाए हैं लेकिन इनमें बचत की राशि उस हिसाब से नहीं है। इन खातों का कुल डिपोजिट बेस में हिस्सा एक फीसदी से भी कम है। इन खातों की सक्रियता अब बढ़ने की उम्मीद है। जनधन खातों में राशि बढ़ने से बैंक भी मजबूत होंगे और जो लोग अभी बैंकिंग से दूर हैं, इसमें शामिल होंगे।

 
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- फोटो : gghfh
5-सरकारी योजनाओं के लिए  फंड की उपलब्धता 
मोदी सरकार के इस फैसले के वो पैसा भी गिनती में आएगा जो अभी तक लोगों के पास था लेकिन सरकारी आंकड़ों में दर्ज नहीं था। अब यह पैसा बैंकों के माध्यम से सरकार की नजर में आएगा। आने वाले दिनों में कर के तौर पर सरकार की आय बढ़ने की संभावना है। यानि सरकार का वित्तीय घाटा कम हो सकता है और सरकार अपनी महत्वकांक्षी योजनाओं को लागू कर सकेगी।   
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