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Most Expensive Book: इतिहास की सबसे अनमोल और महंगी किताब, जानें 500 साल पुरानी बाइबिल क्यों है इतनी खास

Fri, 15 May 2026 01:33 PM IST
Jyoti Mehra फीचर डेस्क, अमर उजाला

सार

World's Most Expensive Book: गुटेनबर्ग बाइबिल को दुनिया की सबसे महंगी और ऐतिहासिक किताबों में गिना जाता है। इसे 1455 के आसपास जर्मनी में योहानेस गुटेनबर्ग ने छापा था। ऐसे में आइए इसकी कीमत और खासियत के बारे में जानते हैं।
 
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दुनिया की सबसे महंगी किताब गुटेनबर्ग बाइबिल - फोटो : AI
Worlds Most Expensive Book: किताबें सिर्फ शब्दों का संग्रह नहीं होतीं, कुछ किताबें इतिहास की दिशा बदलने की ताकत रखती हैं। ऐसी ही एक अनमोल धरोहर है गूटेनबर्ग बाइबिल, एक ऐसी किताब जिसकी कीमत सिर्फ पैसों में नहीं, बल्कि उसके प्रभाव और विरासत में मापी जाती है।

गूटेनबर्ग बाइबिल को दुनिया की सबसे महंगी और ऐतिहासिक किताबों में गिना जाता है। इसे 1455 के आसपास जर्मनी में योहानेस गूटेनबर्ग ने छापा था। यही वह किताब थी जिसने पश्चिमी दुनिया में प्रिंटिंग तकनीक की नई शुरुआत की और ज्ञान के प्रसार को एक नई रफ्तार दी। यह पहली बड़ी किताब थी जो मूवेबल टाइप प्रिंटिंग तकनीक से तैयार हुई थी।

आज के समय में गूटेनबर्ग बाइबिल की एक पूरी प्रति की अनुमानित कीमत 25 मिलियन से 150 मिलियन डॉलर (करीब 200 करोड़ से 1,250 करोड़ रुपये) तक आंकी जाती है। लेकिन दिलचस्प बात यह है कि इतनी बेशकीमती होने के बावजूद इसे खरीदा या बेचा नहीं जा सकता। इसकी ज्यादातर बची हुई प्रतियां दुनिया के बड़े संग्रहालयों, लाइब्रेरी और विश्वविद्यालयों में सुरक्षित रखी गई हैं।
 
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क्या बनाता है इसे खास? - फोटो : adobestock
क्या बनाता है इसे खास?
इस किताब का इतिहास बेहद गौरवशाली है। 1450 के दशक में जर्मनी के मेंज शहर में इसे लैटिन वल्गेट संस्करण में छापा गया था। उस समय इसकी लगभग 180 प्रतियां तैयार की गई थीं, लेकिन आज केवल 49 प्रतियां ही पूरी या आंशिक रूप से मौजूद हैं।
 
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दुनिया की सबसे महंगी किताब - फोटो : adobestock
इसके हर पन्ने पर बारीकी से की गई कारीगरी इसे और भी खास बनाती है। सुंदर अक्षरों की डिजाइन, हाथ से की गई रंगीन सजावट (इल्लुमिनेशन) और उच्च गुणवत्ता के कागज का इस्तेमाल इसे एक कला का उत्कृष्ट नमूना बनाता है।

इतिहास में इसका योगदान भी कम नहीं है। इस किताब ने यूरोप में ज्ञान के विस्तार को गति दी और पुनर्जागरण (रेनेसां) व धार्मिक सुधार आंदोलनों को मजबूती दी।

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इतनी महंगी क्यों है ये किताब? - फोटो : adobestock
इतनी महंगी क्यों है ये किताब?
गूटेनबर्ग बाइबिल की ऊंची कीमत के पीछे कई बड़े कारण हैं। सबसे पहले, इसकी दुर्लभता, दुनिया में इसकी बहुत कम प्रतियां बची हैं। दूसरा, इसका ऐतिहासिक महत्व इसी ने आधुनिक प्रिंटिंग युग की नींव रखी। तीसरा, इसकी कलात्मक सुंदरता यह मध्ययुगीन कला का शानदार उदाहरण है।
 
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दुनिया की सबसे महंगी किताब - फोटो : adobestock
चूंकि इसकी अधिकतर प्रतियां सरकारी संस्थानों या प्रतिष्ठित संस्थाओं के पास हैं, इसलिए इन्हें बाजार में बेचा नहीं जाता। जानकारी के अनुसार, आखिरी बार 1978 में इसकी एक पूरी प्रति 2.4 मिलियन डॉलर में बिकी थी, जो उस समय के हिसाब से बेहद बड़ी रकम थी। आज विशेषज्ञ इसकी कीमत 100 मिलियन डॉलर से भी ज्यादा मानते हैं। गूटेनबर्ग बाइबिल सिर्फ एक किताब नहीं, बल्कि वह क्रांति है जिसने दुनिया को पढ़ने और समझने का नया नजरिया दिया।

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