पांच साल पहले एक व्यक्ति की ऑपरेशन के दौरान मौत हो गई थी। उसे मृत घोषित कर दिया गया लेकिन कुछ मिनट बाद वह जिंदा हो गया। उसने बताया आंखें बंद होने के बाद जब मेरी आंख एक स्पेस जैसी जगह में खुली वहां पर न तो तारे थे और न ही रोशनी।
मैं न तो गर्म था और न ही ठंडा। थकान और भूख भी नहीं लग रही थी। वहां काफी शांति थी, मुझे पता था कि पास में रोशनी है मगर मैं जाने नहीं पा रहा था। मैं अपनी जिंदगी के बारे में सोचने लगा यह कोई मोंटाज नहीं था। मुझे लगा मैं आलस्य में किताब उलट-पलट रहा हूं और टुकड़े यहां वहां पड़े हैं।
उन्होंने कहा यह जो कुछ भी मेरे साथ हुआ इससे मेरा नजरिया कुछ चीजों के प्रति बिलकुल बदल गया। मुझे अभी भी मरने से डर लगता है लेकिन अब मैं इस बारे में चिंता नहीं करता कि मरने के बाद क्या होगा।'