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इस गांव में रावण जलाने के नाम से डर जाते हैं लोग, जानिए क्यों

Tue, 11 Oct 2016 10:03 AM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला
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दशहरे का दिन बुराई पर अच्छाई, झूठ पर सच्चाई की विजय का प्रतीक माना जाता है। पूरे देश में हर्षोल्लास के साथ रावण का दहन करके लोग इस दिन को मनाते हैं। लेकिन एक जगह ऐसी भी है जहां लोग चाहकर भी दशहरा नहीं मना पाते। क्योंकि यहां दशरहा मनाने पर गांव में छा जाता है मातम।
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ग्रेटर नोएडा से 10 किलोमीटर दूर रावण का गांव बिसरख है। यहां न तो कभी रामलीला होती है और न ही रावण दहन किया जाता है। इस गांव में जब भी लोग दशहरा मनाने की कोशिश करते है तब यहां किसी न किसी की मौत हो जाती है।
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65 साल पहले इस गांव में पहली बार रामलीला का आयोजन किया गया था। उस दौरान मुख्य किरदार निभाने वाले शख्स की मौत हो गई। एक बार फिर जब लोगों ने रामलीला का आयोजन किया तो उस दौरान भी रामलीला के एक पात्र की मौत हो गई। जिसके बाद रामलीला का आयोजन नहीं किया गया।

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कहते हैं कि त्रेता युग में इस गांव में ऋषि विश्रवा का जन्म हुआ था। उन्हीं के घर रावण का जन्म हुआ था। अब तक इस गांव में 25 शिवलिंग मिल चुके हैं, एक शिवलिंग की गहराई इतनी है कि खुदाई के बाद भी उसका कहीं छोर नहीं मिला है।
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इस गांव में परंपरा के मुताबिक लोग दशहरा तो मनाते हैं, लेकिन रावण दहन नहीं करते।
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