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इस देश के लोगों को गप्पे लड़ाना नहीं है पसंद, खामोशी है यहां की खूबसूरती

Tue, 23 Oct 2018 02:00 PM IST
लौरा स्ट्यूडरस, बीबीसी
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Finland - फोटो : VisitFinland.com
हम हिंदुस्तानी बहुत बातूनी होते हैं। कोई मिल भर जाए, तो फिर जो बातों का सिलसिला शुरू होता है, वो कई बार घंटों तक चलता रहता है। और क्या हाल है... से शुरुआत होती है। फिर राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय मसलों तक खिंचती चली जाती है।

चाय की दुकान पर अनजान लोगों से बहसें लडाई जाती हैं। लोग पान खाने के शौकीन हों न हों, पान की दुकान पर हो रही चर्चा में जरूर शामिल हो जाते हैं। ट्रेन के सफर में मुबाहिसे छिड जाते हैं कि कौन सा नेता अच्छा और कौन खराब है।
 
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Finland - फोटो : Nautilus | Science Connected
पर, एक देश ऐसा भी है, जहां गप-शप को बहुत बुरा माना जाता है। जहां खामोशी ही देश की संस्कृति है। जहां लोग एक-दूसरे से ये पूछना भी नापसंद करते हैं कि क्या हाल है। उत्तरी यूरोपीय देश फिनलैंड में कहा जाता है कि खामोशी सोना है और बतियाना चांदी। फिनलैंड के लोग मानते हैं कि अगर कोई अहम बात चर्चा के लिए नहीं है, तो खामोश रहना बेहतर है। फिनलैंड में करीबी दोस्तों को छोड दें तो लोगों के बीच छोटी-मोटी गप-शप बिल्कुल नहीं होती।
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Finland - फोटो : ERIC NATHAN/ALAMY BBC
हर तरफ बस सन्नाटा ही सन्नाटा
कॉफी शॉप में जाएंगे तो बस इतनी सी बात होगी कि आप क्या चाहते हैं। आप किसी सार्वजनिक जगह पर बैठे हैं, टहल रहे हैं या मेट्रो मे सफर कर रहे हैं, कोई बात करता नहीं नजर आएगा। सन्नाटा ही दिखेगा। लोग अपने आस-पास से गुजर रहे अनजान लोगों से बेफिक्र रहते हैं, बात नहीं करते। ऐसे माहौल में किसी और देश के लोग शोर मचाने वाले समझे जाते हैं।

फिनलैंड में सॉना बाथ का बहुत चलन है। पूरे देश में करीब 20 लाख सॉना हैं। इनमें लोग दोस्तों के साथ जाते हैं। कई बार बिना कपडों के ही साथ में सॉना बाथ लेते हैं। यानी बंद ठिकानों में उन्हें ये नजदीकी नहीं अखरती। पर जैसे ही लोग सॉना से बाहर आते हैं, उनका मिजाज एकदम बदल जाता है।

 

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Finland - फोटो : NATALIIA RUMIANTSEVA/ALAMY
फिनलैंड के लोग अक्सर विदेशी नागरिकों, सैलानियों या दोस्तों से भी कहीं पर अचानक मिलने-बतियाने में यकीन नहीं रखते। फिनलैंड में अंग्रेजी सिखाने वाली टीना लैटवाला कहती हैं कि वो लोगों को जो ट्रेनिंग देती हैं, उसमें एक सबक ये भी है कि दूसरों से कैसे छोटी-मोटी गप-शप की जाए।
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Finland - फोटो : STEPHEN SAKS PHOTOGRAPHY/ALAMY
ट्रेनिंग लेने वालों को कहा जाता है कि वो तसव्वुर करें कि कहीं जा रहे हैं और किसी से मुलाकात हो जाती है। टीना कहती हैं कि ट्रेनिंग के लिए आए लोगों को वाकई छोटी-सी बात करने में भी मुश्किल हो रही थी। 

फिनलैंड की छात्रा एलिना जेफ्रेमॉफ कहती हैं कि टीवी की वजह से वो दूसरे देशों की संस्कृति और गप-शप की अहमियत से वाकिफ हुई हैं। मगर, फिनलैंड में ये छोटी सी बात करना बहुत मुश्किल होता है। 

एलिना बताती हैं कि, 'टीना की क्लास में हमें बुनियादी बातें सिखाई गईं। जैसे कि, आप कैसे हैं। मैं ठीक हूं, तुम्हारी मां कैसी हैं। ये वो सवाल-जवाब थे जो बहुत बुनियादी थे। हमें इनके जवाब भी पता थे। मगर वो हमारी बातचीत का हिस्सा नहीं थे।' 
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Finland - फोटो : ROLF ADLERCREUTZ/ALAMY
भाषा का पेचीदा होना है एक वजह

एलिना कहती हैं कि फिनलैंड के समाज को थोडा खुलने, थोडा बेतकल्लुफ होने की जरूरत है। 'अगर मेट्रो में मेरा सामान गिर जाए और मैं उसे उठाते हुए खुद पर हंसने लगूं, तो आस-पास मौजूद अनजान लोग भी मेरी हंसी में शामिल हों।'

फिनलैंड के लोगों की खामोशी की कई वजहें बताई जाती हैं। पहली तो ये कि फिनिश भाषा बहुत पेचीदा है। सीधे संवाद मुश्किल है। फिर शहरों के बीच दूरियां भी बहुत हैं। इससे लोग छोटी बातों पर वक्त जाया करना पसंद नहीं करते। लेकिन, हेलसिंकी यूनिवर्सिटी में पढाने वाली प्रोफेसर लॉरा कोल्बे कहती हैं कि फिनलैंड के लोगों को खामोश मुल्क का तमगा पडोसी देशों ने दिया।

वजह ये है कि हमेशा दूसरे देशों की संस्कृति की तुलना अपने यहां के चलन से की जाती है। जैसे स्वीडन और जर्मनी से लोग फिनलैंड में आकर बसे। उन्हें अपने देश के मुकाबले यहां लोग कम बोलने वाले दिखे, तो उन्होंने इसे खामोश देश का तमगा दे दिया। फिनलैंड में दो भाषाएं बोली जाती हैं फिनिश और स्वीडिश। छह साल की उम्र से फिनलैंड के लोग अंग्रेजी भी पढने लगते हैं। लॉरा मानती हैं कि फिनलैंड के लोगों को जब दूसरी या तीसरी भाषा में जज्बात बयां करने पडते हैं, तो वो कुछ बोलने के बजाय खामोशी को तरजीह देते हैं।
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Finland - फोटो : Made By Maider
ओउलू यूनिवर्सिटी की रिसर्चर डॉक्टर एना वाटानेन इस बात से इत्तेफाक रखती हैं। वो कहती हैं कि फिनलैंड और दूसरी भाषाओं के बीच फर्क है। बयां करने में जज्बातों के मायने बदल जाते हैं। डॉक्टर एना कहती हैं कि तमाम देशों में ये सवाल आम है कि, 'आप कैसे हैं'। ये बातचीत शुरू करने वाला सवाल है। इसके जवाब में किसी गंभीर बात की उम्मीद नहीं की जाती है।

लेकिन फिनलैंड में यही बात 'मीता कूलु' कह कर बोली जाती है। इस सवाल के जवाब में ठोस बात पूछी जाती है। मतलब ये कि तुम्हारी जिंदगी कैसी चल रही है, ये बताओ। या ये कि तुम्हारे जीवन में नया क्या हो रहा है, ये बताओ।
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Group Talking - फोटो : wikiHow
बेकार सवालों की कोई जगह नहीं

लेखिका कैरोलिना कोरहोनेन कहती हैं कि ऐसा नहीं है कि फिनलैंड के लोग गप-शप नहीं करते। बस वो लोगों की निजता का सम्मान करते हैं। दूसरों को परेशान नहीं करना चाहते। वो बिना वजह के बात नहीं करना चाहते।

फिनलैंड की बात न करने की आदत पूरी दुनिया में मशहूर है। फॉर्मूला वन ड्राइवर किमी रायक्कोनेन के बारे में मशहूर है कि वो लोगों से बात नहीं करते। इस पर कॉमिक बुक भी लिखी गई हैं। चीन में जो लोग चुप रहना चाहते हैं वो कहते हैं कि वो आध्यात्मिक रूप से फिनलैंड के वासी बन गए हैं। फिनलैंड के जो लोग विदेश में रह कर आते हैं, उन्हें अपने यहां का सन्नाटा खलने लगता है।

फिनलैंड की चॉकलेट बनाने वाली कंपनी गूडियो के सीओओ जूसी सैलोनेन कहते हैं कि, 'जब मैं अमरीका में रह कर अपने देश लौटा, तो एक कॉफी की दुकान पर पहुंचने पर मुझे झटका लगा। मुझसे बस यही पूछा गया कि आपको क्या चाहिए। इसके आगे न किसी ने कुछ पूछा और न पीछे। ये मेरा देश है। मैं इसे पसंद करता हूं। मगर लोगों को थोडा तो खुलना चाहिए। इसमें कोई नुकसान नहीं।' उम्मीद यही की जानी चाहिए कि अपनी निजता का सम्मान करते हुए फिनलैंड के लोग, छोटी-मोटी बातचीत करना शुरू करेंगे।
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