Finland
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भाषा का पेचीदा होना है एक वजह
एलिना कहती हैं कि फिनलैंड के समाज को थोडा खुलने, थोडा बेतकल्लुफ होने की जरूरत है। 'अगर मेट्रो में मेरा सामान गिर जाए और मैं उसे उठाते हुए खुद पर हंसने लगूं, तो आस-पास मौजूद अनजान लोग भी मेरी हंसी में शामिल हों।'
फिनलैंड के लोगों की खामोशी की कई वजहें बताई जाती हैं। पहली तो ये कि फिनिश भाषा बहुत पेचीदा है। सीधे संवाद मुश्किल है। फिर शहरों के बीच दूरियां भी बहुत हैं। इससे लोग छोटी बातों पर वक्त जाया करना पसंद नहीं करते। लेकिन, हेलसिंकी यूनिवर्सिटी में पढाने वाली प्रोफेसर लॉरा कोल्बे कहती हैं कि फिनलैंड के लोगों को खामोश मुल्क का तमगा पडोसी देशों ने दिया।
वजह ये है कि हमेशा दूसरे देशों की संस्कृति की तुलना अपने यहां के चलन से की जाती है। जैसे स्वीडन और जर्मनी से लोग फिनलैंड में आकर बसे। उन्हें अपने देश के मुकाबले यहां लोग कम बोलने वाले दिखे, तो उन्होंने इसे खामोश देश का तमगा दे दिया। फिनलैंड में दो भाषाएं बोली जाती हैं फिनिश और स्वीडिश। छह साल की उम्र से फिनलैंड के लोग अंग्रेजी भी पढने लगते हैं। लॉरा मानती हैं कि फिनलैंड के लोगों को जब दूसरी या तीसरी भाषा में जज्बात बयां करने पडते हैं, तो वो कुछ बोलने के बजाय खामोशी को तरजीह देते हैं।