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भूलकर भी इस देश में किसी को देखकर मत हंसना, अगर बातचीत की तो पड़ सकते हैं लेने के देने

Sat, 23 Jun 2018 12:13 PM IST
बीबीसी हिंदी
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silence
कम बोलना कुछ लोगों की आदत हो सकती है। लेकिन पूरा देश ही कम से कम बात करे, ये सुनने में थोड़ा अटपटा लगता है। लातविया यूरोप का ऐसा देश है जिसे कम बोलने वालों का देश कहा जाता है। कम बोलना यहां की संस्कृति का हिस्सा है। हालांकि लातवियन खुद इसकी निंदा करते हैं। लातवियन मिजाज से काफी क्रिएटिव होते हैं। कुछ लोग कम बोलने और रचनात्मक सोच में रिश्ता तलाशते हैं। इसे लातविया की खासियत मानते हैं।

हाल में लंदन बुक फेयर में एक लातवियन कॉमिक बुक चर्चा में रही। इसे लातवियन लिटरेचर संस्था ने तैयार किया था। दरअसल ये किताब इस संस्था की 'आई एम इंट्रोवर्ट मुहिम' का हिस्सा है। इस मुहिम को शुरू किया है लातविया की लेखिका अनेते कोनस्ते ने। इनके मुताबिक कम बोलना, लोगों से कम मिलना जुलना अच्छी आदत नहीं है। जहां सारी दुनिया एक मंच पर आ गई है, हर विषय पर लोग खुलकर अपनी राय रख रहे हैं वहां खामोश रहना नुकसान दे सकता है। लोगों को अपनी आदत बदलने की जरूरत है।
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jungle
एकांत पसंद होते हैं यहां के लोग
लातविया के लोग इतने खुदपसंद और अपनी ही दुनिया में मगन रहने वाले क्यों हैं, इस पर एक रिसर्च की गई। पाया गया कि कम बोलने की आदत ज्यादातर उन लोगों को है जो रचनात्मक कामों जैसे कला, संगीत या लिखने के काम से जुड़े हैं। लातविया के एक मनोवैज्ञानिक के मुताबिक क्रिएटिविटी लातविया के लोगों की पहचान के लिए जरूरी है। इसीलिए यहां के लोग कम बोलना पसंद करते हैं। उनका जहन हर वक्त नए ख्याल सोचता रहता है।

दरअसल लातविया की सरकार ने शिक्षा और आर्थिक उन्नति के लिए जितनी योजनाएं बनाई हैं उसके लिए रचनात्मक सोच को प्राथमिकता दी गई है। यूरोपियन कमीशन की रिपोर्ट के मुताबिक यूरोपियन यूनियन मार्केट में रचनात्मक काम करने वाले सबसे ज्यादा लातविया के लोग हैं। लातविया के लोग ना सिर्फ कम बोलते हैं बल्कि एकांत पसंद होते हैं। एक दूसरे से मुखातिब होने पर किसी के चेहरे पर मुस्कुराहट तक नहीं बिखरती। अजनबियों को देखकर तो बिल्कुल ही नहीं।

लातविया की राजधानी रीगा के गाइड फिलिप बिरज़ुलिस का कहना है कि यहां के लोग एक दूसरे का सामना करने से कतराते हैं। इसीलिए खुली सड़क की बजाए गलियों से रास्ता तय करना पसंद करते हैं। यहां तक कि ऐसे कार्यक्रमों का आयोजन भी कम ही होता है जिसमें ज्यादा से ज्यादा लोग जमा हों। जैसे लातवियन सॉन्ग एंड डांस फेस्टिवल यहां का बड़ा आयोजन है। इस आयोजन में दस हजार से भी ज्यादा गायक और डांसर्स हिस्सा लेते हैं, लेकिन कम लोगों के आने की वजह से ये फेस्टिवल पांच साल में एक बार ही होता है। लेखिका कोनस्ते के मुताबिक अकेलेपन और एक दूसरे से दूर रहने की हद ये है कि, रस्मी सलाम दुआ से बचने के लिए लोग पहले पड़ोसी के घर से निकलने का इंतजार करते हैं।
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Caricature
लातविया की संस्कृति और पीढ़ियां
लातविया के लोग कम बोलने वाले और एकांत पसंद जरूर हैं। पर, इसका ये मतलब बिल्कुल नहीं है कि जरूरत पड़ने पर वो किसी की मदद नहीं करते। अगर आप कभी किसी मुश्किल में होंगे तो वो खुद आगे बढ़कर आपकी मदद कर देंगे।

लातविया के लोग मानते हैं कि कम बोलना सिर्फ इनके कल्चर का ही हिस्सा नहीं है, बल्कि स्वीडन और फिनलैंड के लोग तो उनसे भी ज्यादा एकांत पसंद हैं। यहां एक और बात पर ध्यान देने की जरूरत है। लातविया की आबादी में तमाम तरह के लोग रहते हैं। यहां बहुत से दूसरे देशों के लोग भी रहते हैं जिनकी भाषा और संस्कृति लातविया की संस्कृति का हिस्सा बन गई है।

लातविया में बड़ी संख्या में रूसी मूल के लोग भी रहते हैं क्योंकि लंबे वक्त तक ये सोवियत संघ का हिस्सा रहा था। इनमें से भी एक पीढ़ी ऐसी है जो सोवियत यूनियन के उस दौर की है जब लोगों पर हर तरह से नजर रखी जाती थी। साथ ही उन पर एक जैसी जीवन शैली थोपी जाती थी।

वहीं दूसरी पीढ़ी ऐसी है जो पूंजीवाद के दौर में पली बढ़ी है। इस पीढ़ी का दुनिया देखने और समझने का नजरिया पहली पीढ़ी से बिल्कुल अलग है। लिहाजा लातविया के लोगों की इस आदत के लिए किसी एक वजह को जिम्मेदार ठहराना गलत होगा।

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Latvia
दूर-दराज में अभी भी रहते हैं लोग
लातविया की भौगोलिक स्थिति भी इस तरह के मिजाज के लिए जिम्मेदार है। यहां घने जंगल हैं और आबादी कम है। लिहाजा एक दूसरे से दूरी बनाए रखने के लिए लोगों के पास भरपूर जगह है। लातविया के लोग प्रकृति प्रेमी हैं। वो अक्सर शहरों से दूर जंगलों में जाकर कुछ वक्त गुजारते हैं। वो लकड़ी के मकानों में जरूरत भर के सामान के साथ गुजारा करते हैं।

हालांकि जंगलों में वक्त बिताने की ये परंपरा बीसवीं शताब्दी में सोवियत सरकार के समय ही ख्त्म हो गई थी लेकिन आज भी कुछ हद तक ये परंपरा जारी है। आर्किटेक्चर ओजोला के मुताबिक 1948 से 1950 के बीच लातविया में दूर-दराज इलाकों में रहने का चलन 89.9 फीसद से घटकर 3.5 फीसद रह गया था।

एकांत पसंद होने के बावजूद दिलचस्प बात ये है कि लातविया की बड़ी आबादी मॉडर्न अपार्टमेंट में रहती है। आंकड़ों को जमा करने वाली वेबसाइट यूरोस्टेट के मुताबिक यूरोप की जितनी आबादी अपार्टमेंट में रहती है उसका बड़ा हिस्सा सिर्फ लातवियन लोगों का है।

 
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Latvia
वहीं रियल स्टेट कंपनी इकटोर्नेट के सर्वे के मुताबिक दो तिहाई से ज्यादा आबादी अलग-थलग प्राइवेट घरों में रहना पसंद करते हैं। कुछ लोगों का ये भी कहना है कि लातवियन लोगों को एकांत में रहने की आदत के लिए भारी कीमत चुकानी पड़ सकती है। लातविया में बाहरी लोगों की संख्या काफी बढ़ गई है और मूल लातवियनों की आबाद कम हो गई है। नतीजतन मूल लातवियनों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

अगर कभी आपको लातविया जाने का मौका मिले तो वहां कि खामोशी से घबराने की जरूरत नहीं है। शुरूआत में थोड़ा अटपटा जरूर लगेगा लेकिन जब वहां के लोगों से दोस्ती हो जाएगी तो आप खुद को अकेला महसूस नहीं करेंगे। लातविया के लोग जब किसी से रिश्ता जोड़ते हैं तो उसे दिल से निभाते हैं।
 
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