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विश्व की सबसे ऊंची प्रतिमा 'स्टैचू ऑफ यूनिटी' इसलिए है खास, चीन से छिनेगा ताज

Sun, 14 Oct 2018 04:17 PM IST
फीचर डेस्क, अमर उजाला
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दुनिया की सबसे ऊंची मूर्ति अब चीन नहीं भारत के पास होगी। भारत ने विश्व की सबसे ऊंची प्रतिमा 'स्टैचू ऑफ यूनिटी' बनाकर नया कीर्तिमान अपने नाम कर लिया है। अभी तक दुनिया की सबसे ऊंची मूर्ति का नाम पूछो तो लोग 'चीन की स्प्रिंग टेंपल बुद्धा' बताते थे। लेकिन अब यह हकीकत बदलने वाली है। बहरहाल, आइए जानते हैं दुनिया की सबसे ऊंची इस प्रतिमा में क्या कुछ खास है। 
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गुजरात के नर्मदा जिले में सरदार सरोवर बांध के पास बनाई जा रही दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा 'स्टैचू ऑफ यूनिटी' अब बनकर लगभग तैयार है। गुजरात के केवड़िया में नर्मदा नदी पर बने सरदार सरोवर बांध से महज 3.32 किलोमीटर की दूरी पर इस विशालकाय प्रतिमा को बनाया गया है।
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'स्टैचू ऑफ यूनिटी' प्रतिमा का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 31 अक्टूबर को करेंगे। सात किलोमीटर की दूरी से 182 मीटर ऊंची यह विशाल प्रतिमा आपको दिखने लेगी। 
 

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इस स्मारक की आधारशीला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए 31 अक्तूबर, 2013 को पटेल की 138 वीं वर्षगांठ के मौके पर रखी थी। गुजरात के सीएम रहते नरेंद्र मोदी की इच्छा थी कि वल्लभ भाई पटेल की एक ऐसी प्रतिमा बने जो कि विश्व में सबसे ऊंची हो।
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गुजरात में बन रहे इस स्टैच्यू की खास बात ये है कि इसके अंदर दो लिफ्ट रखी गई हैं। स्टैच्यू बाहर से जितनी भव्य है, अंदर से उतनी ही मनमोहक होगी। स्टैच्यू के अंदर बनी लिफ्ट यहां आने वाले पर्यटकों को ऊपर तक ले जाएंगी, जहां सरदार पटेल के दिल के पास एक गैलरी बनाई गई है, यहां से पर्यटकों को सरदार पटेल बांद और वैली का मनमोहक नजारा देखने को मिलेगा। 
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82 मीटर ऊंचे सरदार पटेल के इस स्टैच्यू को बनाने के लिए चार धातुओं का इस्तेमाल किया गया है। ऐसा दावा किया गया कि इसमें हजारों साल तक जंग नहीं लगेगी। यह प्रतिमा भारत के लौह पुरुष कहे जाने वाले सरदार वल्लभभाई पटेल की है। बताया गया कि सरदार पटेल की ये मूर्ति 6.5 तीव्रता वाले भूकम्प को भी झेल सकती है।
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'स्टैच्यू ऑफ यूनिटी' को आर्किटेक्ट पद्मश्री राम सुतार और उनके बेटे ने मिलकर तैयार किया है। दावा किया गया कि प्रतिमा को सात हिस्सों में तैयार किया गया है। इस मूर्ति में सरदार वल्लभ भाई पटेल अपनी पारंपरिक वेशभूषा में नजर आएं. बता दें कि सरदार पटेल सिलवटों वाला कुर्ता-धोती, बंडी और कंधे पर चादर ओढ़ा करते थे।

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दावा किया गया है कि 'स्टैच्यू ऑफ यूनिटी' इतनी शक्तिशाली है कि 220 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाला तूफान भी इसे कोई नुकसान नहीं पहुंचा पाएगा। सरदार पटेल की मूर्ति को देखने के लिए नर्मदा जिले पहुंचने वाले पर्यटकों के लिए यहां 52 कमरों वाला 'भारत भवन' भी बनाया जा रहा है। इसके साथ ही पर्यटकों को यहां फूड कोर्ट और फूलों की घाटी के साथ-साथ बोटिंग की भी सुविधा मिलेगी।

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नर्मदा घाट पर सरदार पटेल की इस आधुनिक प्रतिमा को तय समय में तैयार करने के लिए 4076 मजदूरों ने दो शिफ्टों में काम किया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस मूर्ति का निर्माण 800 भारतीय और 200 चीन के कारीगरों ने मिलकर किया है।

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साल 2014 में गुजरात सरकार ने स्टैचू ऑफ यूनिटी के निर्माण का ठेका एक मल्टी-फर्म कंसोर्टियम को सौंप दिया। इस कंसोर्टियम में माइकल ग्रेव्स आर्किटेक्चर एंड डिजाइन और टर्नर कंस्ट्रक्शन (जो इससे पहले दुनिया की सबसे ऊंची इमारत 'बुर्ज खलीफा' बना चुकी है) शामिल हैं।
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उल्लखेनीय है भारतीय इतिहास में सरदार वल्लभ भाई पटेल एक मात्र ऐसे पुरुष हैं, जिन्हें दुनिया भी लौह पुरुष मानती है। इस मूर्ति के निर्माण के लिए केंद्र सरकार ने देश के कोने कोने से लोहा मांगा था। 
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