आज के दौर में कुओं और बावड़ियों का महत्व खत्म होता जा रहा है, लेकिन आज भी गांव-देहातों और कस्बाई इलाकों में जहां स्थानीय लोगों को पानी की कमी से जूझना पड़ता है, वहां कुओं को खोदकर प्राकृतिक जल का स्रोत तैयार किया जाता है।
विज्ञापन
2 of 9
dd
बहुत से लोग ऐसे भी होंगे जिन्होंने राजा-महाराजाओं द्वारा बनाई गई बावड़ियों के बारे में न तो कभी सुना होगा और न ही उन्हें देखा होगा। लेकिन प्राचीन काल में यह बहुत साधारण था। हर राज्य के पास अपने-अपने कुएं होते थे। राजा-महाराजाओं और शाही घरानों के पास तो अपने व्यक्तिगत कुएं भी मौजूद थे जहां किसी अन्य को आने का अधिकार भी नहीं होता था।
विज्ञापन
3 of 9
dd
इतिहास की धरती पर बहुत से कुंओं और बावड़ियों का जिक्र मिलता है लेकिन आज हम आपको दुनिया की सबसे गहरी बावड़ी से परिचित करवाना चाहते हैं जो राजस्थान के आभानेरी गांव में स्थित है। यह गांव जयपुर में स्थित है। आभानेरी गांव के पास अपनी अलग से कोई पहचान नहीं है लेकिन जयपुर का ये छोटा सा गांव इसलिए पर्यटकों के आकर्षण का केन्द्र में रहा है क्योंकि यहां दुनिया की सबसे बड़ी बावड़ी है जो 100 फीट गहरी है।
4 of 9
dd
जी हां, चांद बावड़ी के नाम से मशहूर इस बावड़ी का निर्माण आज से करीब 1200 साल पहले यानि 9वीं शताब्दी के आसपास किया गया था। इस बावड़ी के अंदर 3,500 सीढ़ियां हैं जो नीचे की ओर जाती हैं। उस समय अगर किसी भी व्यक्ति को बावड़ी के भीतर से पानी निकालना होता था तो उसे पहले साढ़े तीन हजार सीढ़ियां नीचे जाना पड़ता था।
विज्ञापन
5 of 9
dd
चौकोर आकार में बनी यह बावड़ी हर ओर से 35 मीटर लंबी है। चार कोनों में से तीन कोनों में सीढ़ियां हैं, जो गहराई तक पहुंचती हैं। इस क्षेत्र की जलवायु रूखी है और उस समय यहां पानी की बहुत कमी रहती थी, तभी इतनी गहरी बावड़ी का निर्माण करवाया गया। इस बावड़ी में जमा किया गया पानी एक साल तक स्थानीय लोगों के लिए पर्याप्त रहता था।
विज्ञापन
6 of 9
gg
इस बावड़ी की संरचना और सीढ़ियों की बनावट भारतीय शिल्पकारी का एक अद्भुत नमूना है। यह उस समय के वास्तुकारों की समझ और गुणोत्तर ज्ञान का एक बड़ा उदाहरण है। यह गांव राजस्थान की राजधानी और प्रमुख शहर जयपुर से करीब 95 किमोमीटर दूरी पर जयपुर-आगरा हाइवे पर स्थित है।
विज्ञापन
7 of 9
dd
इस गांव की स्थापना राजा चांद ने करवाई थी और इसका नाम आभा नगरी यानि रोशनी की नगरी रखा था। लेकिन समय के साथ-साथ आभा नगरी को आभानेरी कहा जाने लगा और आज के समय में यह स्थान अपनी बावड़ियों की वजह से पर्यटकों के आकर्षण का केन्द्र है।
8 of 9
gg
जब आप चांद बावड़ी की गहराई पर जाने लगेंगे तो आप तापमान में भी 5-6 डिग्री की कमी महसूस करने लगेंगे। कहा जाता है मॉनसून के समय में इस बावड़ी में ऊपर तक पानी भर जाता है। कुओं की अपेक्षा बावड़ियां ज्यादा गहरी होती हैं इसलिए इनमें अधिक मात्रा में पानी संरक्षित करके रखा जा सकता है। इन बावड़ियों के निर्माण की शुरुआत का इतिहास भारत से ही जुड़ा हुआ है।
कहा जाता है कि इस बावड़ी में 2 सुरंग हैं जिनमें से एक को अंधेरी और दूसरी को उजाली कहते हैं। इनमें से एक में अंधेरा रहता हैं और दूसरी में थोड़ा बहुत उजाला। बहुत समय पहले 2 बारात इसम अंधेरी नामक गुफा में गई थी। जो कभी वापस लौटकर नही आई। इस बावड़ी का स्वरूप दिखने में भी बड़ा विचित्र है।