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ये है असली 'ठग ऑफ हिंदुस्तान', 3 बार ताजमहल और 2 बार बेचा था लाल किला

Mon, 15 Oct 2018 05:16 PM IST
फीचर टीम, अमर उजाला
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नटवरलाल... शायद ये नाम ही काफी है उस दौर को याद दिलाने के लिए जिसमें तीन बार ताजमहल का और दो बार लालकिले का सौदा हुआ। जी हां, नटवरलाल देश का अब तक का सबसे बड़ा ठग रहा है। इसके कारनामेे पूरी दुनिया में मशहूर हो गए थे। जी हां, नटवरलाल का नाम ठगी का पर्यायवाची शब्द और मुहावरा बन गया है। ये बात है सत्तर, अस्सी और नब्बे के दशक की। इस समय एक के बाद एक कई ठगी की घटनाओं को अन्जाम देकर नटवरलाल भारत का कुख्यात ठग बना था।
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सबसे मजेदार बात ये है कि कानून की नजर में नटवर की गतिविधियां भले ही अपराध हों, लेकिन वह इसे एक समाजसेवा मानता था। अपने जीवनकाल में करोड़ों रुपए ठगने वाले नटवर का कहना था कि वह लोगों से झूठ बोलकर पैसे मांगता है और लोग उसे देते हैं, इसमें उसका क्या कसूर है। यही नहीं, नटवरलाल का दावा था कि अगर सरकार इजाजत दे तो वह ठगी के माध्यम से भारत का विदेशी कर्ज तक उतार सकता है। आज हम आपको उसी नटवरलाल के बारे में बताएंगे। वह अपनी ठगबुद्धि की वजह से कई दशकों तक भारत का मोस्ट वान्टेड मैन बना रहा था।

1.बहुत कम लोग जानते थे नटवरलाल का असली नाम
नटवरलाल का वास्तविक नाम मिथिलेश कुमार श्रीवास्तव था। यह बात बहुत कम लोग जानते थे। नटवर की शातिर बुद्धि के पीछे एक वकील छुपा था। जी हां, नटवरलाल पेशे से एक वकील था। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो उसका जन्म सीवान जिले के जीरादेई गांव से तकरीबन 2 किलोमीटर की दूर स्थित गांव बंगरा में हुआ था। 
 
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2. भारत में पहली बार सामने आया था ऐसा ठग सौदागर
इतिहास में शायद पहली बार सरकारी धरोहरों को बेचने वाला ऐसा कोई ठग सामने आया था। जी हां, यह सच है। नटवरलाल ने तीन बार ताजमहल और दो बार लाल किला और एक बार राष्ट्रपति भवन बेच दिया था। यही नहीं, एक बार तो उसने भारत के संसद भवन को भी बेच दिया था।

 

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3. नटवरलाल को वेश बदलने में थी महारत हासिल
जैसा कि फिल्मों में दिखाया जाता है कि अपराधी कई बार वेश बदलकर जुर्म को अंजाम देता है ताकि कोई उसे पहचान न सके। ऐसा ही तेज दिमाग पाया था नटवरलाल ने। वह अपनी असलियत कभी किसी के सामने नहीं आने देता था। वह इतनी आसानी से वेश बदलकर लोगों को चुना लगा जाता था कि जब दोबारा वह कभी उनकी नजर के सामने भी खड़ा होता था वो उन्हेें पहचान में ही नहीं आता था। यह बात शायद आपके गले न उतर सके लेकिन यह भी कहा जाता है कि नटवरलाल ने एक बार राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद का फर्जी हस्ताक्षर कर ठगी की थी। बहरूपिये और ठगी का खेल खेलने वाला नटवरलाल उसके 52 नामों में से ही एक था। कहा जाता है कि नटवरलाल ने धीरूभाई अम्बानी, टाटा और बिरला उद्योगपतियों के अलावा सरकारी अधिकारियों से भी ठगी की थी। अब आप समझ सकते हैं कि वह उस समय कितनी पहुंची हुई चीज था।

 
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4. नटवरलाल पकड़ा गया तो क्या हुआ था उसके साथ
जब नटवरलाल पकड़ा गया था तो उसे 113 साल की सजा हुई। मोस्ट वान्टेड अपराधियों की लिस्ट में शुमार नटवरलाल के खिलाफ 8 राज्यों में 100 से अधिक मामले दर्ज थे। वह अपने जीवनकाल में 9 बार गिरफ्तार हुआ, लेकिन हर बार किसी न किसी तरह पुलिस की चंगुल से भाग निकलता। अंतिम बार जब वह पुलिस की पकड़ से भागा, तब उसकी आयु 84 साल थी। 24 जून 1996 को उसे कानपुर जेल से एम्स (AIIMS) अस्पताल लाया गया। नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर पुलिस टीम को चकमा देकर वह भाग निकला। इस घटना के बाद उसे फिर कभी देखा नहीं जा सका।

 
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5. मरने में भी कर ली ठगी
नटवरलाल ने मरने का नाटक कर भी लोगों से ठगी की थी। वर्ष 2009 में नटवरलाल के वकील ने उसके खिलाफ दायर 100 मामलों को हटाने की याचिका दायर की थी। उसके वकील ने दलील दी कि 25 जुलाई 2009 को नटवरलाल मर चुका है। लेकिन नटवरलाल के भाई का दावा था कि उसकी मौत करीब 13 साल पहले वर्ष 1996 में ही हो गई थी।

 
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6. बॉलीवुड के नटवरलाल
नटवरलाल के जीवन से प्रेरित होकर बॉलीवुड में एक फिल्म बनी, मिस्टर नटवरलाल उन्हीं में से एक थी। इस फिल्म में मुख्य भूमिका में थे अमिताभ बच्चन। फिर आई राजा नटवरलाल नामक फिल्म। जिसमें मुख्य भूमिका निभाई है इमरान हाश्मी ने।

 
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7. आपराधिक छवी के बावजूद नटवरलाल के थे फैन 
बिहार में उसके गांव के लोगों की मांग थी कि यहां नटवरलाल के नाम का एक स्मारक स्थापित किया जाए। दरअसल, उसके गांव के लोगों का मानना था कि नटवरलाल एक भला आदमी था और लोगों की मदद करता था। नटवरलाल के इस व्यवहार से प्रभावित होकर ही कई लोग उसके शागिर्द बन गए थे। मगर कोेई दूजा उसके सरीखा न हो सका। वो अकेला ही ऐसा था जो इतिहास रच गया। 
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