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काबिल-ए-तारीफ है इस शख्स का कारनामा, पैर नहीं कर रहा था काम फिर भी बचा ली हजारों की जान

Tue, 30 Oct 2018 03:28 PM IST
फीचर डेस्क, अमर उजाला
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- फोटो : social media
कर्नाटक में उडुपी जिले के 53 साल के कृष्णा पुजारी की जितनी भी तारीफ की जाए वो कम है। कहा भी जाता है कि अगर इरादे नेक हों तो मुश्किलें भी घुटने टेक देती है। एक पैर से विकलांग कृष्णा पुजारी की सोशल मीडिया में काफी तारीफ हो रही है।  
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- फोटो : social media
दरअसल, उडुपी जिले के कोरंगरापडी में रहने वाले कृष्णा पुजारी ने हजारों रेल यात्रियों की जान बचा जो बचा ली है। कृष्णा पुजारी बीते शनिवार की सुबह टहलने के लिए निकले थे तभी उन्होंने देखा कि ब्रह्माथाना नागबाना के पास रेल की पटरी पर दरार है, तभी वहां से एक ट्रेन गुजरी, जिसके बाद पटरी पूरी तरह टूट गई। 
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- फोटो : social media
आपको जानकर हैरानी होगी कि कृष्णा पुजारी का बीमारी के चलते दायां पैर कमजोर हो गया है और डॉक्टर ने उन्हें सुबह टहलने के लिए कहा था। लेकिन शनिवार को सुबह 6 बजकर 45 मिनट के आसपास टहलने के दौरान ही उनकी नजर जैसे ही इस टूटी पटरी पर पड़ी। इसके बाद बिना देरी किए और बिना कुछ सोचे वह एक पैर के सहारे करीब तीन किलोमीटर दौड़ते हुए इंद्रली रेलवे स्टेशन की ओर दौड़ते हुए पहंचे। कृष्णा कहते हैं कि उनके एक पैर में बहुत दर्द हो रहा था लेकिन मन में यही बात चल रही थी कि अगर समय पर सूचना नहीं दी तो कई लोगों की जान जा सकती है, वो अपने दाएं पैर की परवाह किए बिना भागते चले गए। उन्हें खुशी है कि बड़ा हादसा टल गया।

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- फोटो : YouTube
कृष्णा पुजारी की सूचना पर रेलवे अधिकारियों ने तत्काल अलर्ट जारी किया। इसके बाद वह रेलवे की टीम के साथ उस स्थान पर पहुंचे। जब तक एक ट्रेन और वहां से गुजर चुकी थी, लेकिन यह दरार अब काफी बड़ी हो गई थी। अधिकारियों ने बताया कि एक ट्रेन को टूटी पटरी से सात किलोमीटर पहले और दूसरी ट्रेन को 16 किलोमीटर पहले रोका गया। इसके बाद टूटी हुई पटरी की मरम्मत की गई। जिसके 40 मिनट बाद यातायात फिर से बहाल हो सका। उनके इस बहादुरी भरे कारनामे की वजह से हजारों ट्रेन यात्रियों की जान बचाई जा सकी। 
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कोरंगरापडी के रहने वाले कृष्णा पुजारी एक फूड स्टॉल पर काम करके अपने परिवार का पेट पालते हैं। पुजारी ने बताया कि एक साल पहले मेरे नर्व सिस्टम में कोई कमी आई गई थी। जिसकी वजह से उनके दाएं पैर ने काम करना बंद कर दिया था। मुझे डॉक्टर ने सलाह दी थी कि रोज पथरीली जगह पर सुबह टहले। जिससे मेरी पैर की मसल को आराम मिलेगा। जिस कारण में रोज रेलवे ट्रैक के किनारे टहने जाता था।
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