फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

इतिहास में आज भी दर्ज है इस खतरनाक तोप की धमक, जहां गिरा गोला वहां बन गया तालाब 

Mon, 08 Oct 2018 05:27 PM IST
फीचर डेस्क, अमर उजाला
विज्ञापन
1 of 9
पुराने राजा-महाराजाओं के इतिहास को जानने के इच्छुक हैं तो यह खबर आपके काम की है। हम आपको बताने जा रहे हैं एक ऐसी तोप के बारे में जिसके बारे में शायद ही आपने पहले कभी सुना होगा।भारतीय राजा-महाराजाओं का इतिहास, उनकी विरासत और शानो- शौकत बेहद दिलचस्प है, उनके अस्त्र-शस्त्रों भी खास थे। जानिए ऐसी ही एक खास तोप के बारे में। 


 
विज्ञापन

2 of 9
जयपुर में जयगढ़ किले पर रखी जयबाण तोप एशिया में सबसे बड़ी तोप मानी जाती है। इसके गोले से शहर से 35 किलोमीटर दूर एक गांव में तालाब बन गया था। 
विज्ञापन

3 of 9
1
आज भी यह तालाब मौजूद है और गांव के लोगों की प्यास बुझा रहा है। अरावली की पहाड़ियों पर बना जयगढ़ दुर्ग का निर्माण 1726 में हुआ था। 

4 of 9
विश्व की सबसे बड़ी यह तोप जयगढ़ किले के डूंगर दरवाजे पर रखी है, इसका कुल वजन 50 टन है। जयबाण तोप की नली से लेकर अंतिम छोर की लंबाई 31 फीट 3 इंच है। 
 
विज्ञापन

5 of 9
जानकार कहते हैं कि 35 किलोमीटर तक मार करने वाले जयबाण तोप को एक बार फायर करने के लिए 100 किलो गन पाउडर की जरूरत होती थी। 

 
विज्ञापन

6 of 9
जयबाण तोप को पहली बार टेस्ट-फायरिंग के लिए चलाया गया था तो जयपुर से करीब 35 किमी दूर स्थित चाकसू नामक कस्बे में गोला गिरने से एक तालाब बन गया था। जयगढ़ किले के अंदर का दृश्य भी देखने लायक है। अरावली पहाड़ियों के बीच किले और किले की दीवारें अभेद हैं। 
 
विज्ञापन

7 of 9
तोप का गोला बनाने का उपकरण भी खास था, जयबाण तोप में 8 मीटर लंबे बैरल रखने की सुविधा है। यह दुनिया भर में पाई जाने वाली तोपों के बीच सबसे ज्यादा प्रसिद्ध तोप है।
 

8 of 9
जयगढ़ किले में रखी जयबाण तोप को लेकर बताते हैं कि यही वो दीवार पर है जिसपर रखकर तोप चलाई गई थी। तोप की क्षमताओं और उससे जुड़ी कई जानकारियां वहां लगे बोर्ड पर पढ़ी जा सकती है।
विज्ञापन

9 of 9
इतिहासकार बताते हैं कि अधिक वजन के कारण इसे किले से बाहर नहीं ले जाया गया और न ही कभी युद्ध में इसका इस्तेमाल किया गया था। 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें