एक बैले डांसर एक पार्क की बेंच पर अपना बटुआ रखकर भूल जाती है। वो वहां से उठ कर चली जाती है। कुछ देर बाद उसे एहसास होता है कि बटुआ पार्क में ही रह गया है, लेकिन, वो जरा भी परेशान नहीं होती। उसे पता है कि बटुआ पार्क की बेंच पर सुरक्षित रखा होगा। इस बैले डांसर का नाम है मिन्ना तरवामाकी। पर मिन्ना आखिर दुनिया के किस देश में रहती हैं? ऐसी कौन सी जगह है, जहां वो पार्क में बटुआ भूलने पर भी बेफिक्र हैं?
उस देश का नाम है फिनलैंड। ये उत्तरी यूरोप में बसा हुआ देश है। साल 2018 की वर्ल्ड हैप्पीनेस रिपोर्ट के मुताबिक फिनलैंड दुनिया का सबसे खुशहाल देश है। लेकिन फिनलैंड इस रिपोर्ट से इत्तिफाक नहीं रखता। हैप्पीनेस रिसर्च इंस्टीट्यूट के सीईओ माइक वाइकिंग का कहना है कि फिनलैंड के लोग जज्बाती तौर पर अंतर्मुखी होते हैं। वो कभी भी बहुत खुलकर अपनी खुशी या गुस्से का इजहार नहीं करते। यहां के लोग अलग-थलग, अपनी-अपनी जिंदगी में मगन रहने वाले हैं। ये लोग बहुत संतुलित जीवन जीते हैं। शायद उनकी खुशियों का राज यही है।
सकारात्मक चीजों को बढ़ावा देने वाली कंपनी पॉजिटिवॉरिट ओए ने पिछले साल ही फिनलैंड की बेले डांसर मिन्ना तरवामाकी को फिनलैंड की सबसे खुशहाल हस्ती के तौर पर नॉमिनेट किया था। वो कहती हैं कि फिनलैंड में खुशहाली की सबसे बड़ी वजह सुरक्षा का भाव है। कोई अपना सामान अगर कहीं भूल भी जाता है तो वो उसे वहीं पड़ा मिल जाता है। कोई किसी की चीज को छूता तक नहीं।
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खुशहाली के लिए सबसे जरूरी क्या
वो खुद को यहां सबसे ज्यादा सुरक्षित महसूस करती हैं लेकिन, फिर भी वो हैप्पीनेस सर्वे की रिपोर्ट से इत्तिफाक नहीं रखतीं। इनके मुताबिक ये रिपोर्ट फिनलैंड के लोगों की असली खुशी को पेश नहीं करती। वहीं, कनाडा की ब्रिटिश कोलम्बिया यूनिवर्सिटी के प्रोफ़ेसर और वर्ल्ड हैप्पीनेस रिपोर्ट के सह-संपादक जॉन हैलीवेल का कहना है कि खुशहाली को मापना इमोशनल स्टडी बिल्कुल नहीं है। बल्कि इस रिपोर्ट के जरिए सारी दुनिया में रहन-सहन के स्तर को नापा जाता है। इसी पैमाने पर फिनलैंड सबसे आगे निकला है।
वो कहते हैं कि जीवन स्तर बेहतर करने में किसी देश की जीडीपी और प्रति व्यक्ति आय के साथ-साथ सेहत और लंबी उम्र अहम होती है लेकिन, इसके अलावा लोगों का एक दूसरे से जुड़ाव, एक दूसरे की मदद करना, उनका सहारा बनना, अपने फैसले खुद करने की आजादी होना भी अहम होता है।
ये सब उदारता और विश्वास की वजह से होता है और इसी से जीवन स्तर बेहतर होता है। फिनलैंड के लोगों में ये लक्षण सबसे ज्यादा पाए गए हैं। फिनलैंड की यूनिवर्सिटी ऑफ हेलसिंकी के मनोवैज्ञानिक भी इस बात से सहमत हैं कि खुशहाली के लिए विश्वास सबसे अहम है। लोग चाहते हैं उन पर भरोसा किया जाए और वो दूसरों पर यकीन कर सकें। ये भरोसे का ही नतीजा है कि फिनलैंड में अगर कोई पैसों से भरा बटुआ कहीं भूल जाता है तो उसे वो जस का तस उसी जगह पर मिल जाता है।
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अजनबी भी रम जाते हैं
इस सच्चाई को आजमाने के लिए रीडर्स डाइजेस्ट ने एक टेस्ट किया। पाया गया कि सबसे ज्यादा बटुए हेलसिंकी में ही मालिकों को लौटाए गए थे। दिलचस्प बात तो ये है कि फिनलैंड में अजनबी भी आकर उतने ही भरोसेमंद हो जाते हैं जितना कि फिनलैंड के लोग हैं। इस साल पहली बार अजनबियों को भी सर्वे में शामिल किया गया। पाया गया कि फिनलैंड के मूल निवासियों की ही तरह बाहर से आकर बसे लोग भी उतने ही खुश थे। इससे जाहिर है कि फिनलैंड में खुशी का एहसास सिर्फ सजातीय समाज की वजह से नहीं है। बल्कि, जिस तरह से देश का निजाम चलाया जाता है, वो लोगों को खुशी देता है।
फिनलैंड में सभी का ख्याल
फिनलैंड की सरकार रहमदिली से चलती है। यहां मानवाधिकारों का सम्मान बहुत ज्यादा है। बात चाहे लैंगिक समानता की हो या फिर रोजगार की, यहां सभी का ख्याल रखा जाता है। यहां तक कि पर्यावरण संबंधी पॉलिसी भी हर छोटी-छोटी बात का ख्याल रखकर तैयार की जाती है। इन्हीं सबकी वजह से यहां के लोगों का जीवन-स्तर अन्य देशों की तुलना में बेहतर है, और, यहां खुशहाली है।
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अगर किसी के लिए खुशहाली का पैमाना हर वक्त मुस्कुराते रहना, नाचना-गाना, भरपूर पैसा खर्च करना है तो हो सकता है उनके लिए फिनलैंड के लोग खुशहाल ना हों। भले ही यहां के लोग भरपूर शराब पीते हैं, लेकिन उसका भी सलीका है। खुशहाली से हमारा मतलब क्वालिटी ऑफ लाइफ है। प्रोफेसर वाइकिंग का कहना है कि फिनलैंड के लोगों को इस सर्वे रिपोर्ट पर हैरानी शायद इसलिए हुई क्योंकि वो समझ ही नहीं पाए कि सर्वे के जरिए क्या चीज मापी जा रही है।
फिनलैंड के लोग अपने जज्बात दबाना बखूबी जानते हैं। इसे वो सिसू कहते हैं, जिसका मतलब है ताकत, वैराग्य और लचीलापन। फिनलैंड के लोग जज्बात दबाने को अपनी ताकत समझते हैं। ऐसा वो इसलिए करते हैं क्योंकि वो शांत जीवन जीना पसंद करते हैं। नाखुश करने वाली तमाम चीजों को खुद से दूर करना भली भांति जानते हैं।
हैप्पीनेस सर्वे दुनिया के बहुत से देशों पर किया गया था, जिन देशों के हालात बेहतर थे, वहां के लोगों से ज्यादा सवाल पूछे गए थे। लेकिन सीरिया, लाइबेरिया और अफगानिस्तान जैसे देश, जहां के हालात से ही उदासी साफ जाहिर हो रही थी, वहां ज्यादा सवाल नहीं पूछे गए।
अगर फिनलैंड की खुशहाली के राज की बात की जाए तो ये राज यकीन और उदारता में छिपा है। हैलीवेल का कहना है कि जब सर्वे रिपोर्ट में फिनलैंड का नाम सबसे ऊपर आया तो हर कोई वहां जाकर रहने की ख्वाहिश जाहिर करने लगा, लेकिन ये मुमकिन नहीं है। अगर खुशी की तलाश में सभी वहां जाकर बस जाएंगे, तो, वहां के लोगों की खुशी काफूर हो जाएगी, लेकिन हम सभी को फिनलैंड से खुश रहने का गुर सीखना चाहिए।