फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

इसलिए सूर्योदय से पहले दी जाती है अपराधी को फांसी

Sat, 17 Dec 2016 10:33 AM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला
विज्ञापन
1 of 6

हमारे देश में अपराधी को फांसी देने के लिए सूर्योदय से पहले का समय तय किया गया है। लेकिन क्या कभी आपने सोचा है कि अपराधी को सुबह होने से पहले ही फांसी पर क्यों लटकाया जाता है। जानिए फांसी की सजा से जुड़ी ऐसी बातें जो आपने कभी नहीं सुनी होंगी।
विज्ञापन

2 of 6
कहा जाता है कि सूर्योदय के बाद एक नया दिन शुरु होता है। जेल में सुबह होते ही लोग नए दिन के काम काज में लग जाते हैं। ऐसे में फांसी की सज़ा सूर्योदय होने से पहले ही दे दी जाती है।
विज्ञापन

3 of 6
फांसी से पहले जेल प्रशासन अपराधी से उसकी आखिरी ख्वाहिश पूछता है। लेकिन आप ये नही जानते होंगे कि कैदी की ख्वाहिश जेल मैन्युअल के तहत हो तभी पूरी की जाती है।

4 of 6

फांसी देने से पहले जलाद कहता कि मुझे माफ कर दिया जाए... हिंदू भाईयों को राम-राम, मुस्लमान भाइयों को सलाम। हम क्या कर सकते हैं हम तो हुकुम के गुलाम।
विज्ञापन

5 of 6

फांसी देने के बाद 10 मिनट तक अपराधी को लटके रहने दिया जाता है। इसके बाद डॉक्टरों की एक टीम ये चैक करती है कि उसकी मौत हुई या नहीं, मौत की पुष्टि होने के बाद ही अपराधी को नीचे उतारा जाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

6 of 6

फांसी के समय जेल अधीक्षक, एग्जीक्यूटीव मजीस्ट्रेट और जलाद का मौजूदगी जरुरी होती है। इनमें किसी एक के भी ना होने पर फांसी नही दी जा सकती।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें