मंदिर में जाते ही मन को अजीब सा सुकून मिलता है। ये सुकून ऐसा होता है जिसे शब्दों में बयां कर पाना किसी के लिए भी मुश्किल है। लेकिन भारत में एक जगह ऐसी है जहां पर हर मंदिर चिता के ऊपर बना हुआ है। भले ही ये आपको सुनने में थोड़ा अजीब जरूर लगे लेकिन ये सच है।
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पब्लिक
श्मशान घाट का नाम सुनकर कुछ लोगों के पसीने छूट जाते हैं लेकिन भारत में स्थित इस मंदिर की इतनी मान्यता है कि लोगों की झोली यहां से कभी भी खाली नहीं जाती। बिहार के दरभंगा में स्थित माधेश्वर परिसर इस तरह के मंदिर की एक मिसाल है।
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गांव
यहां पर एक से बढ़कर एक सुंदर मंदिर बने हैं। इस मंदिर की खासियत यही है कि यहां पर बने सभी मंदिर दरभंगा राज परिवार के किसी न किसी सदस्य की चिता पर बनें हैं। चिता पर मंदिर बनाने की शुरुआत राजा माधो सिंह के समय से मानी जाती है।
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इसी वजह से इस खास परिसर का नाम माधेश्वर परिसर रखा गया। राजा का निधन वाराणसी में हुआ था और उनकी अस्थियों को माधेश्वर मंदिर के परिसर में रखा गया।जिस स्थान पर राजा की अस्थियों को रखा गया वहां पर घास का चबूतरा है।
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गांव
ऐसा कहा जाता है कि किसी की भी मौत होने पर उसे घास वाले चबूतरे पर ही रखा जाता है और फिर अंतिम संस्कार किया जाता है। इस परिसर में मां काली की प्रतिमा भी विराजमान है। कहा जाता है कि इस मंदिर के नीच महाराजा रामेश्वर सिंह की चिता है तो वहीं इस मंदिर के बायीं ओर माता अन्नपूर्णा का मंदिर है।
जिसके नीचे रामेश्वर सिंह की पत्नी की चिता के ऊपर बनाया गया है। इस मंदिर की लोगों के प्रति बहुत आस्था है। लोगों का ऐसा विश्वास है यहां पर सारी मनोकामनाएं पूरी होती हैं जिसके बाद वो मां काली को चुनरी, साड़ी और बलि अर्पित करते हैं।