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अर्थ आवर डे आज, दुनियाभर में इसलिए बंद किए जाते हैं बिजली के उपकरण

Sat, 30 Mar 2019 06:03 PM IST
गौरव शुक्ला फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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- फोटो : Learn Sabkuch
बिजली बचाने के लिए आज रात एक घंटे के लिए पूरी दुनिया में अंधेरा छा जाएगा। ऐसा इसलिए किया जा रहा क्योंकि आज अर्थ आवर डे (world earth hour day 2019 ) मनाया जा रहा है। अर्थ आवर डे की शुरुआत बिजली और पर्यावरण बचाने के मकसद से की गयी है। 
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- फोटो : WWF Deutschland
'अर्थ आवर डे' बिजली बचाने के मकसद से शुरू किए गए अभियान का हिस्सा है। इस अभियान का नाम 'अर्थ ऑवर वर्ल्ड वाइड फंड' है, जिसे World Wide Fund for Nature (वर्ल्ड वाइड फंड फॉर नेचर) संस्था ने शुरू किया था। इस संस्था का मकसद लोगों को बिजली बचाने, पर्यावरण की सुरक्षा के प्रति जागरूक करना है।
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अर्थ आवर डे वाले दिन तय समय पर गैर जरूरी बिजली उपकरण बंद रखने की अपील की जाती है। इस साल 30 मार्च यानी आज रात को 8:30 से 9:30 तक बिजली बचाने की अपील की जा रही है। सोशल साइट्स पर भी लोग इसके लिए अपील कर रहे हैं। भारत के केंद्रीय पर्यावरण मंत्री डॉ हर्ष वर्धन ने भी ट्वीट करके इस मुहिम का हिस्सा बनने की अपील की है। इस साल का स्लोगन है, Change the Way We Live.
 

 

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- फोटो : shutterstock.com
'अर्थ आवर डे' के दिन तय किए गए एक घंटे में रिक्वेस्ट की जाती है कि वे घरों, दफ्तरों की गैर जरूरी लाइट्स और बिजली से चलने वाली बाकी चीजें बंद रखें। अर्थ ऑवर वर्ल्ड वाइड फंड अभियान से जुड़ा दफ्तर सिंगापुर में है। पहली बार इसे साल 2007 में ऑस्ट्रेलिया के सिडनी शहर में मनाया गया, इसमें लोगों से सारी लाइटें 60 मिनट के लिए बंद करने की अपील की गई। धीरे-धीरे इसे विश्वभर में अपनाया मनाया जाने लगा। आज यह सिर्फ एक अभियान नहीं बल्कि एक आंदोलन के रूप में खड़ा हो चुका है। पिछले साल भारत में मुंबई के गेट वे ऑफ इंडिया पर भी अर्थ आवर मनाया गया था।
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- फोटो : Social Media
सिडनी में दिए संदेश के दौरान लाइटें बंद कराने के बाद करीब 162 देशों में लाइट्स बंद करने अभियान फैला। 2017 में अनुमान लगाया गया था कि 172 देशों से इस अभियान को समर्थन मिला। जिस संस्था के जरिए ये अभियान चलाया जा रहा है वह दुनिया का सबसे बड़ी इंडिपेंडेंट कंन्जरवेशन ऑर्गेनाइजेशन है।
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earth hour 2019 theme - फोटो : Social Media
इस संस्था को 5 मिलियन से ज्यादा लोग सपोर्ट करते हैं, ये लोग 100 से अधिक देशों के बताए जाते हैं। संस्था का उद्देश्य प्रकृति को हो रहे नुकसान को रोककर भविष्य को बेहतर बनाना है। दुनिया का सबसे बड़ा सौर उर्जा संयंत्र स्पेन में और दूसरे नंबर पर जर्मनी में है। भारत में राजस्थान, गुजरात और उड़ीसा में सौर ऊर्जा पैदा की जाती है।
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- फोटो : Social Media
बिजली बचाने के लिए भारत में छोटी लेकिन जरूरी कोशिश ये हुई कि एडिसन बल्ब (लट्टू) की जगह सीएफएल और फिर एलईडी बाजारों में उपलब्ध कराई गई। पीली रोशनी वाले बल्ब से ज्यादा लाइट खर्च होती थी। सीएफएल में इसकी तुलना में कम और एलईडी में उससे भी कम बिजली खर्च होती है।

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- फोटो : InYourArea
दुनिया भर में नए-नए संसाधनों से बिजली बनाने और बचाने के लिए प्रयोग किए जा रहे हैं। हाल ही में एक ऐसी डिवाइस क्रिएट की गई, जिसके जरिए वाईफाई से बिजली आ सकेगी। ये डिवाइस MIT (Massachusetts Institute of Technology) और द टेक्निकल यूनिवर्सिटी ऑफ मैड्रिड के वैज्ञानिकों ने बनाई है। डिवाइस वाईफाई सिग्नल्स को एनर्जी में बदलेगी। वो एनर्जी इलेक्ट्रिसिटी बनाने में इस्तेमाल की जा सकती है।

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- फोटो : Wikipedia
अब तक सौर उर्जा का इस्तेमाल सिर्फ सूर्य के प्रकाश में ही कर सकने में समर्थ थे लेकिन अब स्विडन के रिसर्चर्स ने इसे सूरज की रौशनी न होने पर भी इस्तेमाल करने लायक बना दिया है। उन्होंने सौर उर्जा को इकट्ठा कर, एक तरह का तरल पदार्थ (fluid) तैयार किया है, जिसे सूरज की रौशनी न होने पर भी (बाद में इस्तेमाल) किया जा सकता है। वैज्ञानिकों का दावा है कि इस तरल पदार्थ को महीनों-सालों तक सुरक्षित रखा जा सकता है और जरूरत पड़ने पर ये इस्तेमाल करने लायक होगा।
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मार्च के आखिरी शनिवार को मनाया जाता है ये दिन 

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- फोटो : Tornos News
'अर्थ आवर डे' हर साल मार्च के आखिरी शनिवार को मनाया जाता है। देश में पिछले साल तो कई जगह लोगों ने कैंडल जलाकर भी अर्थ आवर को सेलिब्रेट किया था। आप भी आज रात 8.30 से 9.30 बजे अपने घर के इलेक्ट्रॉनिक सामान और गैर जरूरी लाइटों को बंद रखें और प्रकृति को बचाने के इस मुहिम का हिस्सा बनें।
 

 
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