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Woman Naga Sadhu: बेहद रहस्यमयी है महिला नागा साधुओं की दुनिया, जानिए इनसे जुड़ी हैरान करने वाली बातें

Sat, 07 Jan 2023 06:53 PM IST
धर्मेंद्र सिंह फीचर डेस्क, अमर उजाला
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बेहद रहस्यमयी है महिला नागा साधुओं की दुनिया - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
Female Naga Sadhu: उत्तर प्रदेश की संगम नगरी प्रयागराज में हर साल माघ मेले का आयोजन होता है। माघ पूर्णिमा के स्नान के साथ माघ मेले की शुरुआत हो चुकी है जिसका समापन महाशिवरात्रि के दिन होगा। डेढ़ माह तक चलने वाले माघ मेले में गंगा-यमुना और सरस्वती के त्रिवेणी संगम पर आस्था की डुबकी लगाने के लिए लोगों की भीड़ जुटती है। माघ मेले के दौरान न सिर्फ श्रद्धालु बल्कि बड़ी संख्या में साधु-संत संगम में स्नान करने के लिए मीलों दूर से आते हैं। 

संगम में स्नान करने के लिए आने वाले नागा साधु सबसे अधिक आकर्षण का केंद्र होते हैं। नागा साधुओं के बारे में कम जानकारी होने की वजह से इनके विषय में जानने की लोगों में अधिक उत्सुकता होती है। पुरुषों की तरह ही महिला नागा साधु भी होती हैं। महिला नागा साधु भी अपने जीवन को पूरी तरह से ईश्वर को समर्पित कर देती हैं। हम आपको अपनी इस खबर में महिला नागा साधुओं से जुड़े रोचक तथ्यों के बारे में बताने जा रहे हैं...
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बेहद रहस्यमयी है महिला नागा साधुओं की दुनिया - फोटो : iStock
नागा साधुओं की रहस्यमयी दुनिया के बारे में सभी लोगों ने जरूर सुना होगा। लेकिन महिला नागा साधुओं का जीवन सबसे निराला और अलग होता है। गृहस्थ जीवन से दूर हो चुकीं महिला नागा साधुओं की दिन की शुरुआत और अंत दोनों पूजा-पाठ के साथ ही होती है। इनका जीवन कई तरह की कठिनाइयों से भरा होता है। नागा साधुओं को दुनिया से कोई मतलब नहीं होता है और इनकी हर बात निराली होती है। 
 
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बेहद रहस्यमयी है महिला नागा साधुओं की दुनिया - फोटो : iStock
अखाड़े बनाते हैं नागा साधु
महिला नागा साधु बनने के बाद सभी साधु-साध्वियां उन्हें माता कहकर पुकारती हैं। माई बाड़ा में महिला नागा साधु होती हैं जिसे अब विस्तृत रूप देने के बाद दशनाम संन्यासिनी अखाड़ा का नाम दिया गया है। साधु-संतों में नागा एक पदवी होती है। साधुओं में वैष्णव, शैव और उदासीन संप्रदाय हैं। इन तीनों संप्रदायों के अखाड़े नागा साधु बनाते हैं। 

 

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बेहद रहस्यमयी है महिला नागा साधुओं की दुनिया - फोटो : iStock
जानिए कैसे बनती हैं महिला नागा साधु
पुरुष नागा साधु नग्न रह सकते हैं, लेकिन महिला नागा साधु को इसकी इजाजत नहीं होती है। पुरुष नागा साधुओं में वस्त्रधारी और दिगंबर (निर्वस्त्र) होते हैं। महिलाओं को भी दीक्षा दी जाती है और नागा बनाया जाता है, लेकिन वह सभी वस्त्रधारी होती हैं। महिला नागा साधुओं को अपने मस्तक पर तिलक लगाना जरूरी होता है। लेकिन वह गेरुए रंग का सिर्फ एक कपड़ा पहन सकती हैं जो सिला हुआ नहीं होता है। इस वस्त्र को गंती कहा जाता है।  

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बेहद रहस्यमयी है महिला नागा साधुओं की दुनिया - फोटो : iStock
नागा बनने की प्रकिया है बेहद कठिन
महिला नागा साधुओं के बनने की प्रक्रिया के बारे में जानने के बाद आप सोचने पर मजबूर हो जाएंगे। महिला नागा साधुओं की जिंदगी बेहद कठिन होती है। नागा साधु बनने कि लिए इनको कड़ी परीक्षा से गुजरना होता है। नागा साधु या संन्यासनी बनने के लिए 10 से 15 साल तक कठिन ब्रह्मचर्य का पालन करना जरूरी होता है। नागा साधु बनने लिए अपने गुरु को यकीन दिलाना होता है कि वह इसके योग्य हैं और अब ईश्वर के प्रति समर्पित हो चुकी हैं। इसके बाद गुरु नागा साधु बनने की स्वीकृति देते हैं। 

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बेहद रहस्यमयी है महिला नागा साधुओं की दुनिया - फोटो : iStock
नागा साधु बनने से पहले महिला की बीते जीवन के बारे में जाना जाता है। यह देखा जाता है कि वह ईश्वर के प्रति समर्पित है या नहीं। नागा साधु बनने के बाद कठिन साधना कर सकती है या नहीं। नागा साधु बनने से पहले महिला को जीवित रहते अपना पिंडदान करना होता है और मुंडन कराना पड़ता है।
 
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बेहद रहस्यमयी है महिला नागा साधुओं की दुनिया - फोटो : iStock
इसके बाद महिला को नदी में स्नान कराया जाता है। महिला नागा साधु पूरा दिन भगवान का जाप करती हैं और सुबह ब्रह्ममुहुर्त में उठ कर शिवजी का जाप करती हैं। शाम को दत्तात्रेय भगवान की पूजा करती हैं। दोपहर में भोजन के बाद वह शिवजी का जाप करती हैं। अखाड़े में महिला नागा साधु को पूरा सम्मान दिया जाता है। 

 
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बेहद रहस्यमयी है महिला नागा साधुओं की दुनिया - फोटो : iStock
कुंभ मेले के दौरान नागा साधुओं के साथ ही महिला साधु भी शाही स्नान करती हैं। हालांकि, पुरुष नागा के स्नान करने के बाद वह नदी में स्नान करती हैं। अखाड़े की महिला नागा साधुओं को माई, अवधूतानी या नागिन कहकर बुलाया जाता है। लेकिन माई या नागिनों को अखाड़े के किसी प्रमुख पद के लिए नहीं चुना जाता है। 
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