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आखिर शव का पोस्टमॉर्टम दिन में ही क्यों किया जाता है, रात में क्यों नहीं?

Mon, 26 Aug 2019 03:10 PM IST
सोनू शर्मा फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
अक्सर ऐसे कई सवाल मन में आते हैं, जिनका जवाब मिलना थोड़ा मुश्किल होता है। हालांकि नामुमकिन नहीं। ऐसा ही एक सवाल है कि आखिर शवों का पोस्टमॉर्टम दिन में ही क्यों किया जाता है, रात में क्यों नहीं? तो हम आपको बता दें कि इसके पीछे कई वैज्ञानिक वजहे हैं, जिनके बारे में शायद ही आपको पता हों। 

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
पहले तो आप ये जान लीजिए कि आखिर पोस्टमॉर्टम क्यों किया जाता है? दरअसल, पोस्टमॉर्टम एक प्रकार का ऑपरेशन होता है, जिसमें शव का परीक्षण किया जाता है। शव का परीक्षण इसलिए किया जाता है, ताकि व्यक्ति की मौत के सही कारणों का पता लगाया जा सके। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Social media
पोस्टमॉर्टम के लिए मृतक के सगे-संबंधियों की सहमति अनिवार्य होती है। हालांकि कुछ मामलों में पुलिस अधिकारी भी पोस्टमॉर्टम की इजाजत दे देते हैं, जैसे की हत्या। 

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, व्यक्ति की मौत के बाद छह से 10 घंटे के अंदर ही पोस्टमॉर्टम किया जाता है, क्योंकि इससे अधिक समय होने के बाद शवों में प्राकृतिक परिवर्तन, जैसे कि ऐंठन होने लगते हैं। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
शवों का पोस्टमॉर्टम करने का समय सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त तक का ही होता है। इसके पीछे वजह ये है कि रात में ट्यूबलाइट या एलईडी की कृत्रिम रोशनी में चोट का रंग लाल के बजाए बैंगनी दिखाई देता है और फॉरेंसिक साइंस में बैंगनी रंग की चोट का कोई उल्लेख नहीं किया गया है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
रात में पोस्टमॉर्टम नहीं कराने के पीछे एक धार्मिक कारण भी बताया जाता है। चूंकि कई धर्मों में रात को अंतिम संस्कार नहीं किया जाता है, इसलिए कई लोग मृतक का पोस्टमॉर्टम रात को नहीं करवाते हैं।   
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