प्रतीकात्मक तस्वीर
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कहा जाता है कि पहले डॉक्टरों से लेकर अस्पताल के सभी कर्मचारी सफेद कपड़े पहने रहते थे, लेकिन साल 1914 में एक प्रभावशाली डॉक्टर ने इस पारंपरिक ड्रेस को हरे रंग में बदल दिया। तब से यह चलन ही बन गया। हालांकि, कुछ-कुछ डॉक्टर नीले रंग के भी कपड़े पहनते हैं। अगर आपने ध्यान दिया होगा तो अस्पताल में पर्दों का रंग भी हरा या नीला ही होता है। इसके अलावा अस्पताल के कर्मचारियों के कपड़े और मास्क भी हरे या नीले रंग के ही होते हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर हरे रंग या नीले रंग में ऐसा क्या खास है, जो अन्य किसी रंग में नहीं?