वाटर सैल्यूट में आमतौर पर दो अग्निशमन वाहन विमान के दोनों ओर खड़े होकर पानी का ऊंचा आर्क बनाते हैं। यह एक सुरंग जैसा दृश्य तैयार करता है, जिसके नीचे से विमान गुजरता है। यह दृश्य केवल दिखावे के लिए नहीं होता है। यह एक सम्मानजनक संकेत है। इसका उपयोग खास मौकों पर किया जाता है, जैसे किसी पायलट की आखिरी उड़ान, किसी नई एयरलाइन सेवा की शुरुआत या किसी महत्वपूर्ण उपलब्धि के जश्न पर।
यह परंपरा मूल रूप से समुद्री उद्योग से प्रेरित मानी जाती है। पहले जहाजों के पहले सफर या खास अवसरों पर फायरबोट्स द्वारा पानी की धार बनाकर उनका स्वागत किया जाता था। धीरे-धीरे यही परंपरा विमानन क्षेत्र में भी अपनाई गई। 1990 के दशक में साल्ट लेक सिटी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर एक रिटायरिंग डेल्टा एयरलाइंस पायलट को सम्मान देने के लिए पहली बार वाटर आर्क बनाकर सैल्यूट किया गया था।
यह समझना भी जरूरी है कि वाटर सैल्यूट और डी आइसिंग प्रक्रिया एक जैसी नहीं होतीं दोनों बिल्कुल अलग हैं। डी आइसिंग एक तकनीकी प्रक्रिया है, जिसमें ठंडे मौसम में विमान पर जमी बर्फ को हटाने या जमने से रोकने के लिए एक खास तरह के तरल का उपयोग किया जाता है।
वहीं वाटर सैल्यूट पूरी तरह से समारोह के लिए होती है। आज के समय में वाटर सैल्यूट एक परंपरा के रूप में जानी जाती है। इसको कई एयरपोर्ट्स और एयरलाइंस गर्व के साथ निभाते हैं। यह विमानन क्षेत्र के लोगों के योगदान को सम्मान देता है।