प्रतीकात्मक तस्वीर
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धीरे-धीरे पटरी पर लौट रहा ट्रैवल कारोबार
इस महामारी को चलते आठ महीने हो गए हैं, ऐसे में एयरलाइंस के ऑपरेशंस फिर से शुरू करने के चलते कई प्लेन सर्विस में वापस भी लौटने लगे हैं। 17 जुलाई को 10,000 पैसेंजर एयरक्राफ्ट आसमान में उड़ रहे थे। इनके जरिए करीब 34,800 उड़ानें हुईं। सीरियम के मुताबिक, अभी भी करीब 7,600 प्लेन जमीन पर खड़े हैं। ये ग्लोबल फ्लीट का करीब एक-तिहाई हिस्सा हैं। इन इकाइयों में प्लेन्स का भविष्य अभी अनिश्चित बना हुआ है। कुछ को यहीं छोड़ दिया जाएगा। अंतिम विकल्प प्लेन को कबाड़े में तोड़ना होगा और इनके पार्ट बेच दिए जाएंगे।
मॉरिस कहते हैं, "इंजनों में कुछ महंगी धातुएं लगी होती हैं और उन्हीं की कुछ कीमत होती है। लेकिन, कई मामलों में एक एयरक्राफ्ट की स्क्रैप वैल्यू उसे काटने की लागत के सामने कुछ नहीं है। इसकी वजह सख्त पर्यावरण कानूनों का होना भी है।" इस वजह से कई अप्रचलित प्लेन शायद और लंबे वक्त तक इन्हीं स्टोरेज इकाइयों में खड़े रहेंगे। बाकी सर्विस में वापस आ जाएंगे।
पेटचेनिक कहते हैं, "इन एयरक्राफ्ट को मेंटेनेंस की जरूरत होती है और आमतौर पर सेवा में वापसी करने से पहले इन्हें टेस्ट फ्लाइट्स से गुजरना पड़ता है।"