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कम बच्चे पैदा करने के नुकसान भी होते हैं? हैरान कर देगी ये जानकारी

Sun, 11 Nov 2018 01:30 PM IST
बीबीसी, हिन्दी
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child - फोटो : Pexels.com
कहते हैं कि बच्चे देश का भविष्य होते हैं लेकिन अगर बच्चे न हों तो किसी भी देश का भविष्य खतरे में पड़ सकता है। इसी खतरे की ओर इशारा करता एक शोध सामने आया है, जिसके मुताबिक महिलाओं की प्रजनन दर में कमी आई है। शोधकर्ताओं के मुताबिक इस शोध के नतीजे हैरान करने वाले हैं और इसके समाज पर गंभीर परिणाम हो सकते हैं, जहां बच्चों से ज्यादा दादा-दादी होने वाले हैं। 
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child - फोटो : Pexels.com
शोध पर आधारित रिपोर्ट कहती है कि प्रजनन दर कम होने का मतलब है कि आधे से ज्यादा देशों में जन्म दर का अस्थायी तौर पर कम होना। इसका मतलब होगा कि इन देशों में उनकी आबादी का विस्तार बनाए रखने के लिए पर्याप्त बच्चे नहीं हैं। 
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Pregnancy - फोटो : Pexels.com
'द लांसेट' में छपे इस अध्ययन में हर देश में साल 1950 से 2017 के बीच ट्रेंड पर नजर रखी गई। साल 1950 में महिलाएं अपने पूरे जीवन में औसतन 4.7 बच्चों को जन्म देती थीं। लेकिन, पिछले साल तक यह प्रजनन दर आधी होकर 2.4 बच्चों पर आ गई।  

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child - फोटो : Pexels.com
हालांकि, अलग-अलग देशों के मुताबिक इसमें काफी अंतर देखने को मिलता है। नाइजर और पश्चिमी अफ़्रीका में प्रजनन दर 7.1 है, लेकिन साइप्रस के भूमध्य द्वीप पर महिलाएं औसतन एक ही बच्चे को जन्म देती हैं। जब भी किसी देश में प्रजनन दर 2.1 से नीचे आती है तो जनसंख्या सिकुड़नी शुरू हो जाती है। ख़ास तौर से उन देशों में जहां बाल मृत्यु दर ज्यादा है। 
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child - फोटो : Pexels.com
1950 में जब ये अध्ययन शुरू हुआ तो कोई भी देश इस श्रेणी में नहीं था। यूनिवर्सिटी ऑफ वॉशिंगटन में इंस्टीट्यूट फॉर हेल्थ मेट्रिक्स एंड इवैल्यूएशन के डायरेक्टर प्रोफेसर क्रिस्टफर मुरै ने कहा, 'हम उस स्थिति में पहुंच गए हैं जब प्रजनन दर रिप्लेसमेंट लेवल के नीचे है। इसलिए अगर कुछ नहीं किया गया तो उन देशों में जनसंख्या कम हो जाएगी। यह बड़ा बदलाव है।' 
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child - फोटो : Pexels.com
आर्थिक रूप से विकसित देश जैसे यूरोप, अमरीका, दक्षिण कोरिया और ऑस्ट्रेलिया आदि में प्रजनन दर कम है, लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि इन देशों में रह रहे लोगों की संख्या कम हो रही है। कम से कम अभी तक तो नहीं, क्योंकि यहां जनसंख्या का आकार प्रजनन दर, मृत्यु दर और प्रवासन का मिश्रण होता है। 
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child - फोटो : Pexels.com
हालांकि, प्रजनन दर में कमी का फिलहाल ज्यादा असर नहीं पड़ेगा। इसके लिए कई पीढ़ियों तक लगातार बदलाव की जरूरत होगी। लेकिन प्रोफेसर मुरै कहते हैं, 'हम जल्द ही उस स्थिति में पहुंच जाएंगे जहां समाज जनसंख्या में कमी से जूझ रहा होगा।' 

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आधे से ज्यादा देशों में पर्याप्त बच्चों का जन्म हो रहा है। लेकिन देश जितना आर्थिक रूप से वृद्धि करते हैं, उतनी ही प्रजनन दर कम होती है। दरअसल, प्रजनन दर कम होने का कारण स्पर्म काउंट कम होना या कोई भी ऐसी सामान्य बात नहीं है जो दिमाग में सबसे पहले आती है, बल्कि इसके तीन मुख्य कारण हैं। पहला ये कि बचपन में कम मौतों का मतलब है कि महिलाओं के कम बच्चे होना। दूसरा, गर्भनिरोधक तक ज्यादा पहुंच और तीसरा शिक्षा और नौकरी में ज्यादा महिलाएं। हालांकि प्रजनन दर कम होने को कई मायनों में सफलता भी कहा जा सकता है। 

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रिपोर्ट के मुताबिक इससे प्रभावित देशों को प्रवासन बढ़ाने पर विचार करने की आवश्यकता होगी। हालांकि, उसकी अपनी समस्याएं हो सकती हैं। इसके अलावा उन्हें महिलाओं को ज्यादा बच्चे पैदा करने के लिए प्रेरित करना होगा जो अक्सर संभव नहीं हो पाता। 

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रिपोर्ट के लेखक प्रोफेसर मुरै कहते हैं, 'वर्तमान रुझान के अनुसार देशों में बहुत कम बच्चे होंगे और जनसंख्या में 65 साल से कम उम्र के ज्यादा लोग रहेंगे। इससे वैश्विक समाज को बनाए रखना बहुत मुश्किल होगा। ऐसे समाज के गहन सामाजिक और आर्थिक परिणामों के बारे में सोचें जहां बच्चे कम और दादा-दादी ज्यादा हैं।'
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प्रोफेसर मुरै का कहना है कि जापान इस मामले में अधिक जागरूक है। उनकी जनसंख्या कम हो रही है, लेकिन मुझे नहीं लगता कि पश्चिमी देश इससे ज्यादा प्रभावित होंगे क्योंकि प्रजनन दर की प्रवासन से भरपाई हो जाएगी। हालांकि, मानव जाति को इसके फायदे भी हो सकते हैं।'  
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