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Past Life Regression Therapy: क्या है ’पास्ट लाइफ रिग्रेशन थैरेपी’ का राज? जिसके जरिए बदला जा सकता है अपना आज

Fri, 05 Aug 2022 04:35 PM IST
ज्योति मेहरा फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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क्या है ’पास्ट लाइफ रिग्रेशन थैरेपी'? - फोटो : istock
Past Life Regression Hypnosis: आज के समय में साइंस ने भले ही कितनी भी तरक्की कर ली हो या वैज्ञानिकों ने अनोखी खोज कर ली हो, लेकिन आज भी विज्ञान किसी के दिमाग का भेद जानने में सफल नहीं है। अगर आज के समय में दिमाग पर नियंत्रण करने के लिए कोई तरीका मौजूद है, तो वह ध्यान और प्राणायाम ही है। इसी का एक हिस्सा ‘पास्ट लाइफ रिग्रेशन थैरेपी’ (पीएलआर) भी किसी के दिमाग पर काबू पाने का एक तरीका है। 

हालांकि, कई लोग इस पर विश्वास नहीं करते या फिर इसे अंधविश्वास मानते हैं। वहीं कुछ लोगों का कहना है कि यदि ये अंधविश्वास है तो ध्यान और प्राणायाम को भी अंधविश्वास माना जाना चाहिए। पास्ट लाइफ रिग्रेशन थैरेपी लगभग बीस हजार साल पुरानी तकनीक है। पास्ट लाइफ रिग्रेशन थैरेपी या (past life regression hypnosis) हमारे बीते कल की यादो को वापस याद दिलाने का वो जरिया है, जिसके माध्यम से हम अपने आज को बदल सकते है। 
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क्या है ’पास्ट लाइफ रिग्रेशन थैरेपी'? - फोटो : istock
अक्सर लोगों के साथ ऐसी समस्या आती है की बीते कल की कुछ यादे उन्हें आगे बढ़ने नहीं देती है। ऐसे में रिग्रेशन थैरेपी की मदद ली जा सकती है। पास्ट लाइफ रिग्रेशन थैरेपी के जरिये हम बीते कल को फिर से याद कर सकते है।
 
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क्या है ’पास्ट लाइफ रिग्रेशन थैरेपी'? - फोटो : istock
पास्ट लाइफ रिग्रेशन थैरेपी के दौरान प्रश्नों की श्रृंखला को लगातार पूछा जाता है। इसके जरिए हम अपने अवचेतन मन (Subconscious mind) को एक्टिव कर पुरानी बातो को फिर से याद करते हैं। इससे हम किसी भी दर्दनाक स्थिति से बाहर निकल सकते हैं।
 

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क्या है ’पास्ट लाइफ रिग्रेशन थैरेपी'? - फोटो : istock
दरअसल, ये दो तरह का होता है, जिसमें एक होता है रिग्रेशन और दूसरा होता है प्रोग्रेशन। अब आप सोच रहे होंगे कि इनमें क्या अंतर है? दरअसल, रिग्रेशन में ध्यान के जरिए इंसान को उसके पिछले समय में ले जाया जा सकता है, वहीं प्रोगेशन की बात करें तो इसमें आने वाले समय में ले जाया जाता है। 
 
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क्या है ’पास्ट लाइफ रिग्रेशन थैरेपी'? - फोटो : istock
‘पास्ट लाइफ रिग्रेशन थैरेपी’ एक प्रकार का सेल्फ हिप्नोटिज्म (आत्म-सम्मोहन) होता है, इसके तहत सांसों पर नियंत्रण पाकर पिछले जन्म या बीते समय में जाया जा सकता है। किसी भी इंसान का दिमाग, ध्यान की इस अवस्था में उस पर हावी नहीं होता। ऐसे में वह जो कुछ भी सोचता है उसे सच्चाई के बहुत करीब माना जाता है।
 
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क्या है ’पास्ट लाइफ रिग्रेशन थैरेपी'? - फोटो : istock
डायरेक्टर सुपवित्र बाबुल ने हाल ही में अपने यूरोप दौरे के बाद एक एक विदेशी डॉक्यूमेंट्री फिल्म देखी थी, जो पास्ट लाइफ रिग्रेशन थैरेपी तकनीक पर आधारित थी। इसके बाद उन्होंने इस टॉपिक पर काम करना शुरू कर दिया।

इस सिलसिले में उन्होंने ढाई साल की रिसर्च की, जिस दौरान वह कई तरह की वर्कशॉप में शामिल हुए और वह डॉक्टर न्यूटन और डॉ. तृप्ति जैन से भी मिले। इसके बाद ही आपके सामने ‘राज़ पिछले जन्म का’ शो आ सका। बता दें डॉ. तृप्ति जैन ‘राज़ पिछले जन्म का’ के थैरेपिस्ट भी हैं।
 
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