कम ही लोगों को यह बात पता होगा कि भारत में दुनिया का सबसे खास पोस्ट ऑफिस है। जी हां, पूरी दुनिया में शायद यह अपनी तरह का अकेला पोस्ट ऑफिस है। आज भी हमारे यहां हर साल करीब 900 करोड़ चिट्ठियों को भारतीय डाक द्वारा 'डोर टू डोर' पहुंचाता है।
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एक रिपोर्ट की मानें तो भारत में 1,55,015 पोस्ट ऑफिस हैं। यह सेवा लगभग 500 साल पुरानी है। औसतन हर एक भारतीय पोस्ट ऑफिस सात हजार से ज्यादा लोगों को सेवा देता है।
लेकिन इनके बीच सबसे खास पोस्ट ऑफिस जम्मू-कश्मीर में हैं। जी हां, श्रीनगर में डल झील के किनारे बना यह डाकघर रातभर खुला रहता है। ये अकेला पोस्ट ऑफिस है जो रात को भी खुला रहता है।
करीब 6 साल पहले तक यह डाकघर जर्जर हालत में था। बाद में इसका कायाकल्प किया गया। श्रीनगर के इस 24 घंटे खुले रहने वाले डाकघर की काया पलटने वाले यहां के पोस्टमास्टर जनरल जॉन सैम्युअल थे।
सैम्युअल ने आते ही इसकी सफाई की जिम्मेदारी ली। सैम्युअल के प्रयासों का ही परिणाम है कि आज यह डाकघर एक पर्यटन के केंद्र के रूप में जाना जाने लगा है। आज इस अनोखे पोस्ट ऑफिस के चर्चे पूरी दुनिया में है।
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सैम्युअल के प्रयासों से ही आज कश्मीर के सभी डाक खाने अच्छा काम कर रहे है। डल लेक के इस डाकघर को सर्वश्रेष्ठ प्रदर्षन में दूसरा स्थान मिला है।
धरती का स्वर्ग कहे जाने वाले कश्मीर की मशहूर डल झील में स्थित इस “फ्लोटिंग पोस्ट ऑफिस” में वो सारे कामकाज होते हैं जो दूसरे सामान्य पोस्ट ऑफिस में होते हैं। हालांकि इस पोस्ट ऑफिस में कुछ चीजें दूसरे डाकघरों से अलग भी हैं। मसलन, इस डाकखाने की मुहर पर तारीख और पते के साथ शिकारी खे रहे नाविक की तस्वीर बनी होती है।
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यह पोस्ट ऑफिस अंग्रजों के जमाने का है लेकिन इसे नया नाम 'फ्लोटिंग पोस्ट ऑफिस' साल 2011 में मिला। इससे पहले इस पोस्ट ऑफिस का नाम नेहरू पार्क पोस्ट ऑफिस था, लेकिन 2011 में तत्कालीन चीफ पोस्ट मास्टर जॉन सैम्युअल ने इसका नाम फ्लोटिंग पोस्ट ऑफिस रखवाया।
साल 2011 में जम्मू कश्मीर के तत्कालीन मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इसका उद्घाटन किया। इस पोस्ट ऑफिस का स्ट्रक्चर भी बेहद खास है। यह पोस्ट ऑफिस जिस हाउसबोट में है उसमें दो कमरे हैं।
एक कमरा पोस्ट ऑफिस के तौर पर काम करता है और दूसरा कमरा संग्रहालय के तौर पर। संग्रहालय में भारतीय डाक के इतिहास से जुड़ी सामग्री प्रदर्शन के लिए रखी गई है।
डल झील में तैरता यह डाकघर वाकयी यहां सजावट में अहम योगदान अदा करता है। जब कभी यह तैरता डाकघर यहां आने वाले पर्यटकों को नजर आता है तो वे इसके बारे में जरूर पूछते हैं और इसके बाद उनके चेहरे पर हैरानी नजर आती है।
हाउसबोट में रुकने वाले सैलानी और वहां घूमने वाले पर्यटक अपने मित्रों-परिजनों को डाक भेजने के लिए इसका इस्तेमाल करते हैं। स्थानीय नागरिक इस डाकघर की बचत योजनाओं का भी लाभ उठाते हैं और अपनी गाढ़ी मेहनत की कमाई इसमें जमा करते हैं।
आम तौर पर इस पोस्ट ऑफिस को कामकाज में कोई दिक्कत नहीं आती लेकिन साल 2014 में आई बाढ़ में ये पोस्ट ऑफिस भी संकट में घिर गया था। राहत एवं बचाव दल के जवानों को इस पोस्ट ऑफिस को बाढ़ के दौरान एक जगह अंकुश लगाकर बांधना पड़ा था।