इस लिस्ट में सबसे पहले नाम आता है ईसाई धर्म के धार्मिक ग्रंथ बाइबिल का। 2007 में नैनोटेक्नॉलोजी की मदद से टेक्निशियनों ने पूरे बाइबिल के सभी हेब्रू भाषा में लिखी गई चीजों को चीनी से भी आधे आकार के दाने जैसी चीज पर अंकित कर दिया। उस छोटे से सिलिकॉन के सतह पर उन्होंने तीन लाख शब्दों को गेलियम आयन्स की मदद से अंकित कर दिया।
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सबसे छोटे मिनिएचर्स
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कभी सोचा है कि माचिस की तिल्लियों से भी पूरा आर्ट का काम किया जा सकता है? तिल्लियों को संभालना और उनसे मास्टरपीस बना देना ऐसी कला है जो हर किसी के बस की बात नहीं। इसे एक तरह का फोकआर्ट माना गया है। इसे लोग प्रिजनआर्ट का भी नाम देते हैं। लेकिन प्रिजनआर्ट कहने से ये मतलब नहीं कि इन्हें बनाने वालों की सजा दी जाती थी या फिर उससे मुक्ति। माचिस से कलाकृतियां बनाने का काम 3500 बीसी से चला आ रहा है।
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खाने-पीने की चीजों से बीज निकालकर हम कितनी आसानी से फेंक देते हैं ना? पर जानते हैं ऐसे कम ही लोग हैं जो इन बीजों से ऐसी कलाकृतियां बनाते हैं कि देखने लायक होता है। मानना मुश्किल है पर ताइवान के नेशनल पैलेस म्यूजियम में जैतून के बीज पर एक आर्टिस्ट ने बोट बनाई है। इसे बोट में आपको आठ लोग साफ दिखते हैं और उनके चेहरे के भाव भी!
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सबसे छोटे चेसबोर्ड के बारे में जानते हैं? 2006 में इसे गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड से नवाजा गया। इसे तमिलनाडु के श्रीविल्लीपुत्तुर में रहने वाले एम मनीकंदन ने बनाया। ये बस 24 मिलिमीटर का था। इसके बाद ई-बे पर भी एक शख्स को छोटा सा चेसबोर्ड बेचते देखा गया जो 24*24 मिलिमीटर का था। इसके ऊपर 22 कैरेट सोने के छह ग्राम का काम भी था।
पूरे एशिया के हिस्से में चावल को समृद्धि से जोड़कर देखा जाता है। ये दाने रोज के खाने का अहम हिस्सा हैं। लोग इसे उगाने के बाद इस्तेमाल में लाने से पहले इसकी पूजा करते हैं। लेकिन कला की दुनिया में भी इसको इज्जत देने का एक अलग ही तरीका अपनाया जाता है। चावल के दानों पर लिखने की कला तुर्की और भारत में काफी पुरानी है। इस्तांबुल के टोपकापी पैलेस में इस आर्ट के सबसे पहले नमूने आज भी देखने को मिलते हैं। इन पर मिनरल ऑयल से लिखा जाता है। ये बहुत कठिन कला है।