'स्कूल' वो मंदिर है जिसकी देवी होती है 'विद्या' और इस मंदिर के पुजारी होते हैं शिक्षक, जो पूरी श्रद्धा से विद्या को पूजते हैं। बच्चों को पढ़ाने का फर्ज निभाते हैं और उन्हें पढ़ा-लिखाकर वे इस काबिल बनाते हैं कि जीवन में आगे चलकर वे मजबूत कदमों पर खड़े हो सकें। लेकिन उस समय क्या हो जब पुजारी को ही मंदिर से निकाल दिया जाए, उसकी श्रद्धाभाव का गला घोंट दिया जाए। जी हां, ऐसा ही कुछ हुआ है छत्तीसगढ़ में जहां एक स्कूल में तीन महिला शिक्षकों को प्रबंधन ने ये कहकर नौकरी से हटा दिया कि वे सुंदर नहीं है...
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school
छत्तीसगढ़ के राजनादगांव जिले के मानपुर इलाके में संचालित सरस्वती शिशु मंदिर की तीन आदिवासी महिला शिक्षकों को प्रबंधन ने यह कहकर नौकरी से हटा दिया कि वे सुंदर नहीं हैं। इतना ही नहीं उन्हें नौकरी से निकाले जाने का कारण आदिवासी होना भी बताया गया है।
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इस घटना के बाद से माना जा रहा है कि बाकी आदिवासी शिक्षकों और कर्मचारियों पर भी प्रबंधन की नजर है। मौका देखते ही उन्हें भी हटा दिया जाएगा। ये तीन शिक्षिका स्कूल से पिछले महीने ही निकाली गई हैं जिसकी शिकायत उन्होंने कलेक्टर से करते हुए मामले की जांच कर कार्रवाई करने की गुहार लगाई है। मीडिया रिपोर्टों की मानें तो स्कूल से निकाली गई शिक्षकों को स्कूल प्रबंधन ने बिना नोटिस के नौकरी से निकाला है साथ ही उनसे अभद्र व्यवहार किया है।
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teacher
मानपुर के सरस्वती शिशु मंदिर में शिक्षिका लिकेश्वरी रावटे, सरोज जाड़े व चंचल सलामे आचार्य के पद पर कार्यरत थी। शाला प्रबंधन द्वारा नए शिक्षा सत्र शुरू होने के पहले ही तीनों को बिना नोटिस दिए नौकरी से निकाल दिया गया। नौकरी से निकाले जाने के बाद शिक्षकों की परेशानी बढ़ गई है।
नौकरी से निकाले जाने का कारण पूछने पर भी शाला शिक्षकों को किसी भी प्रकार से जानकारी नहीं दी जा रही है। जिसके कारण शिक्षकों की परेशानी बढ़ गई है। जब शिक्षकों ने नौकरी से निकाले जाने का कारण पूछा तो शाला प्रबंधन ने कहा कि आप लोग आदिवासी हो आपका व्यवहार प्रींसिपल के साथ ठीक नहीं है और आप सुंदर नहीं हो, कहकर निकाल दिया। शिक्षकों ने बताया कि शाला प्रबंधन समिति के अध्यक्ष द्वारा भी अभद्र व्यवहार किया गया।