टैम्पो में क्षमता से ज्यादा सवारियां ठूंस कर चलना नोएडा और दिल्ली एनसीआर के इलाकोें की शान की परंपरा बन गया है। कमाल की बात तो यह है कि अब लोग बड़े चाव से ऑटो ड्राइवर की सीट पर भी बैठ जाते हैं।
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यकीन मानिए यहां चालक सीट पर तीन, चार और पांच सवारियां बिठाने का रिवाज बन गया है। न कोई रोकने वाला है और न टोंकने वाला। कुछ पैसों के चक्कर में यह टैम्पो चालक बिना किसी डर के क्षमता से ज्यादा सवारियां न सिर्फ टैम्पो में बल्कि ड्राइवर सीट पर भी बैठा लेते है।
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यहां शायद ही कोई ऐसा टैम्पो दिखता होगा कि जिसमें दोनों तरफ से सवारियों का आधा शरीर बाहर की ओर न निकला रहता हो। ऊपर से इनकी रफ्तार हादसे की आशंका को और भी बढ़ा देती है।
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लोग मौत के मुंह में जाएं तो जाएं। जहां चाहा रोका, जहां चाहा खड़ा किया और जहां चाहा सवारी उतारी।
नोएडा शहर के व्यस्तम स्थानों में से एक है सेक्टर 15 का मैट्रो स्टेशन। सबसे ज्यादा अव्यवस्था यहीं से शुरू होती है। इंडियन ऑयल बिल्डिंग के साथ वाली सिंगल लेन सड़क वन-वे होने के बावजूद तमाम परेशानियों से घिरी है जिनमें सबसे बड़ी परेशानी खड़ी करते हैं टैम्पो।
मजे की बात देखों वन वे पर उल्टी दिशा में आ रहे बाइक वालों के चालान बनाने के लिए यातायात पुलिस तैनात है लेकिन टैम्पो का यह जुर्म माफ है। कुछ मीटर चौड़ी इस सडक पर पूरे दिन टैम्पो चालक सवारियों के लिए खड़े रहते हैं और संकड़ी सडक पर जाम की स्थिति बनी रहती है।
मैट्रो स्टेशन की सीढ़ी उतरकर जिस तरफ देखो टैम्पो की भरमार दिखती है। जो सवारियों के चक्कर में कई बार आपस में एक-दूसरे से तो उलझते हैं साथ ही कई बार सवारियां भी इसकी चपेट में आ जाती है।