इंदौर की रहने वाली दो 'स्नेक गर्ल' की कहानी तो आपने सुनी ही होगी न... अगर नहीं तो चलिए हम बताते हैं। ये लड़कियां इसलिए चर्चा में हैं क्योंकि उन्हें लोग अब स्नेक गर्ल के नाम से ही पुकारने लगे हैं। लोगों कहने लगे हैं कि ये दोनों लड़किया धीरे-धीरे सांप में बदलती जा रही हैं।
उनकी त्वचा के कारण ही लोग अब उन्हें स्नेक गर्ल कहकर पुकारने लगे हैं। अगर इन दोनों लड़कियों का हाल आप अपनी आंखों से देख लेंगे तो आपको भी यकीन नहीं होगा। आप सोच में पड़ जाएंगे कि आखिर इन्हें हुआ क्या है..? और यही सवाल पूरी दुनिया के तमाम विशेषज्ञ और डॉक्टरों को जानना हैं।
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snake girl
दरअसल, इन लड़कियों की त्वचा इतनी सेंसिटिव हो गई है कि जब कभी वह धूप में जाती हैं तो वह खुद-ब-खुद उखड़ने लगती है। सिर्फ इतना ही नहीं इनके पूरे शरीर से खून बहने लगता है। इस चलते इनकी त्वचा सांप की तरह दिखने लगी है।
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girls
आपकी जानकारी के लिए बता दें ऐसा दो लाख लोगों में से किसी एक को ही होता है। इस दुर्लभ बीमारी का नाम 'लामल्लार इचथ्योसिस' है। इंदौर के मल्हारगंज के रहने वाले संजय गुप्ता बेटियों सुनिधि (20) और वेदिका (13) की इस बीमारी के इलाज के लिए कहां नहीं गए। वे दिल्ली, मुंबई, पुणे और अहमदाबाद जैसे बड़े शहरों में उन्हें दिखा चुके हैं, लेकिन कहीं भी इसका इलाज नहीं मिला। धूप से बचने के लिए दोनों बहने अधिकतर समय घर में ही बिताती हैं।
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girl with her mother Madhuri Gupta
- फोटो : sujanya das/newslions/mediadrumworld.com
ऐसे में उनका पढ़ना-लिखना, खेलना-कूदना सब मुश्किल में पड़ गया है। इनमें वेदिका कक्षा 8वीं की छात्रा है। इस बीमारी के कारण उसके सिर के बाल झडने लगे हैं। वह स्कूल जाती है तो उसके साथ पढ़ने वाले बच्चे उसे स्नैक गर्ल कहकर चिढ़ाते हैं। इस बीमारी की वजह से दोनों बहनें दिनभर घर में ही रहती हैं हालत यह है कि जरूरी काम के लिए बाहर जाने में भी उन्हें डर लगता है। मां माधुरी का कहना है कि इस बीमारी से तंग आकर बड़ी बेटी सुनिधि ने तो खुद को कमरे में कैद कर लिया है।
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the sanke girl
- फोटो : sujanya das/newslions/mediadrumworld.com
वहीं दूसरी ओर लोगों की अजीब सी प्रतिक्रियाओं की वजह से भी उन्हें बाहर निकलना अच्छा नहीं लगता। इस बारे में लड़की के पिता का कहना है कि परिवार में दो अन्य को भी ऐसी ही बीमारी थी। दोनों की जन्म के कुछ ही वर्षों में मृत्यु हो गई। इस जेनेटिक डिसऑर्डर का यूं तो कोई इलाज नहीं तलाशा गया है, लेकिन इस उम्मीद में कि एक दिन जरूर इस का इलाज तलाश लिया जाएगा कई देशों में इस पर रिसर्च जारी है।
इस कड़ी में स्पेन सबसे आगे बताया जाता है। कहा जा रहा है कि स्पेन में इसका प्रायोगिक इलाज संभव है। उधर, इस बीमारी के कई केस दुनिया के अलग-अलग कोने से सामने आते रहे हैं। लेकिन अभी तक इनका इलाज भी संभव नहीं हो पाया है। स्पेन में जरूर प्रायोगिक इलाज है लेकिन प्रायोगिक इलाज में भी इंसान पूरी तरह से ठीक हो जाए इसकी कोई गैरंटी नहीं रहती।
प्रायोगिक इलाज वह प्रक्रिया है जिसमें डॉक्टर प्रयास कर सकते हैं कि उस बीमारी को ठीक किया जा सके। हालांकि यह बहुत ज्यादा खर्चीला है इसलिए किसी भी आम आदमी को स्पेन जाकर वहां प्रायोगिक इलाज करवाना इतना आसान भी नहीं है। इस तरह के लोगों को गर्मी के मौसम में और भी ज्यादा परेशानी हो जाती है।
गर्मी की वजह से स्किन की नमी ज्यादा तेजी से खत्म होती है और शरीर में भी पानी की कमी हो जाती है ऐसे में परेशानी और बढ़ जाती है। डॉक्टर कहते हैं इस बीमारी में त्वचा फटने लगती है और बाल झडने लगते हैं। धूप में पूरा शरीर लाल हो जाता है। मेडिकल साइंस में अभी तक इसका इलाज नहीं है।