इस दुनिया में एक ऐसी बुरी चीज है जो हर रिश्ते को तार-तार कर देती है, लेकिन शायद ही किसी ने सोचा होगा कि ये चीज एक मां और बेटे के रिश्ते को भी यूं बर्बाद कर सकती है। जी हां, एक ऐसा ही हैरतअंगेज मामला सामने आया है। इसके बारे में जानकर आपके पैरों तले जमीन खिसक जाएगी। मां-बेटे के रिश्ते को तार-तार कर देने वाला ये मामला ही कुछ ऐसा है जिसने मां की उम्रभर की ममता को मात दे दी। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। जी हां, जिस अभागन मां की ममता को उसका अपना बेटा न समझ पाया उसका असल मोल तो दुनिया के लोगों और अदालत ने ही समझा। तभी तो कोर्ट ने अपना फैसला भी मां के पक्ष में ही सुनाया।
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दरअसल, हुआ यूं कि एक बेटे ने अपनी मां के खिलाफ दिल्ली कोर्ट में याचिका दायर कर की थी, जिसपर कोर्ट ने सुनवाई करते हुए उसकी याचिका को खारिज कर दिया और बेटे पर एक लाख रुपए का जुर्माना लगा दिया। अदालत ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि यह मामला बुजुर्ग माता-पिता का अपने बच्चों द्वारा उत्पीड़न का मामला है। इतना ही नहीं कोर्ट ने तो उदाहरण देते हुए यहां तक कह दिया कि ये मामला बिल्कुल बॉलीवुड फिल्म '102 नॉटआउट' की कहानी जैसा है।
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इस मामले की गंभीरता से लेते हुए कोर्ट ने साफ-साफ कहा कि याचिकाकर्ता अपनी मां को 6 हफ्ते के भीतर जुर्माने की रकम का भुगतान करे। इससे पहले अदालत ने याचिका को कानून के खिलाफ आधारहीन बताते हुए उसे खारिज कर दिया। इस मामले की सुनवाई जस्टिस मेहता ने की और सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि आजकल के बच्चे लालच में आकर संपत्ति के लिए अपने बुढ़े माता-पिता को परेशान करने लगते हैं।
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वहीं अदालत में मां की ओर वकील ने ये दलील दी कि याचिकाकर्ता बेटे ने अपनी मां के साथ उत्पीड़न करने का कोई भी मौका नहीं छोड़ा है। ऐसी परिस्थितियों में संपत्ति पर हक के लिए अदालत को रुख स्पष्ट करना चाहिए। वकील ने आंशका जताई कि यदि अदालत कोई स्पष्ट रुख नहीं रखती है तो याचिकाकर्ता बेटा अपनी मां को आगे भी परेशान करता रहेगा। भविष्य में ऐसा न हो इसलिए कोर्ट को इस पर भी कोई साफ रुख जरूर पेश करना चाहिए।
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ये है पूरा मामला
महिला के पति की मौत हो चुकी है। उसकी एक बेटी और एक बेटा है। बेटी ने चितरंजन पार्क स्थित संपत्ति में बंटवारे के लिए याचिका दायर की है। महिला ने इसके लिए अपनी बेटी को समर्थन दिया। इस बात को लेकर बेटे ने ट्रायल कोर्ट में याचिका दायर कर दी। इसी साल मई महीने में ट्रायल कोर्ट ने सुनवाई करते हुए बेटी के पक्ष में फैसला सुनाया तो बेटे ने दिल्ली हाईकोर्ट में इस फैसले के खिलाफ याचिका दायर कर अपील की।
जब ये मामला दिल्ली हाईकोर्ट पहुंचा तो जस्टिस मेहता भी हैरान रह गए। उन्होंने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि मैं यह समझ नहीं पा रहा कि पति की आधी संपत्ति पर पत्नी के हक को भला बेटा किस आधार पर चुनौती दे सकता है। उन्होंने ये भी कहा कि बेटे ने अपने पिता के जीवित रहते हुए इस अनुबंध पत्र को कभी चुनौती नहीं दी। बात यहां तक पहुंचने के बाद भी कोर्ट ने बेटे को एक मौका देते हुए पूछा कि क्या वह अपने रिश्तों को सुधारने के लिए याचिका वापस लने को तैयार है? इस पर भी बेटे ने कहा नहीं, वह इस मामले में अब फैसला और न्याय चाहता है।