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जब हाई कोर्ट में रेप पीड़िता ने खुद ही अपने मामले की जिरह की, देखकर दुनिया हिल गई और फिर...

Wed, 18 Jul 2018 06:40 PM IST
फीचर डेस्क, अमर उजाला
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जिसके साथ ऐसी हैवानियत हुई वह फिर भी हिम्मत कर डटी रही। उसने बिलकुल भी हार नहीं मानी। भले ही इसके लिए उसे खुद ही अपना केस क्यों न लड़ना पड़ा हो लेकिन अंत तक वह न्याय के लिए अकेले ही जंग-ए-मैदान में डटी रही। आखिरकार उसे जीत मिली। जी हां, यह घटना केरल की है। यहां एक लड़की ने केरल हाई कोर्ट में अपने ही बलात्कार का केस लड़ा और जीत हासिल की। इस बीच उसके साथ जो-जो हुआ वह हैरान कर देने वाला है। 
 
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मीडिया रिपोर्टों की मानें तो केरल की कलामस्सेरी पुलिस ने पेशे से डॉक्टर 30 वर्षीय रेप पीड़िता के खिलाफ बीते साल राजेश बाबू पीएन नामक शख्स की शिकायत पर एक केस दर्ज किया था। राजेश ने आरोप लगाया था कि रेप पीड़िता ने खुलेआम सड़क पर कार पार्किंग के दौरान उनके साथ पहले तो झगड़ा किया और फिर उन्हें गाल पर तमाचा जड़ दिया। सिर्फ इतना ही नहीं इस बीच महिला डॉक्टर ने उन्हें अपशब्द भी कहे। 
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वहीं रेप पीड़िता की शिकायत पर भी पुलिस ने राजेश और अन्य के खिलाफ एक केस दर्ज कर लिया। इन लोगों पर डॉक्टर को घर जाने से रोकने और अपशब्द कहने का आरोप लगा था। लेकिन जब झगड़े के मामले की असलियत सामने आई तो जज भी सुनकर चौंक पड़े। दरअसल, झगड़े का ये मामला झूठा था। ऐसा इसलिए किया गया था ताकि रेप पीड़िता को दूसरे मामले में फंसाकर रेप के मामले की सुनवाई से दूर रखा जा सके। इस कारण रेप पीड़िता को काफी परेशानियों का सामना भी करना पड़ा।

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kerala high court
रेप पीड़िता ने आरोप लगाया कि राजेश और उसके साथियों का इरादा बलात्कार मामले की सुनवाई में हिस्सा लेने से उसे रोकना था और वे लोग बलात्कार के आरोपी के निर्देश पर ही ऐसा काम कर रहे थे। रेप पीड़िता की दलील पर जस्टिस के अब्राहम मैथ्यू ने पाया कि राजेश के बयान और डॉक्टर द्वारा कथित चोट के इलाज के बाद जारी सर्टिफिकेट में दर्ज बातें मेल नहीं खा रही हैं। इसके बाद जज ने ही इस केस को खारिज कर दिया। 

 
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सबसे खास बात यह रही है कि अपने बलात्कार के मामले में रेप पीड़िता ने खुद जज से जिरह की। रेप पीड़िता ने कहा, जिसके साथ यह हैवानियत हुई है, उसके अलावा कोई और व्यक्ति दस्तावेजों और साक्ष्यों को ठीक ढंग से पेश नहीं कर सकता है। उन्होंने केस खारिज करने के लिए जज अब्राहम मैथ्यू को धन्यवाद दिया।
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