देखो साहब, मै जिंदा हूं पर छह माह पहले सरकारी अभिलेखों में मुझे मार दिया गया। गांव के सचिव से लेकर बीडीओ के दफ्तर तक चक्कर काट कर खुद के जिंदा होने का सुबूत देकर थक चुका हूं लेकिन सुनवाई नहीं हो रही है। कुछ लोगों की नजर मेरी जमीन पर है। यदि जिंदा घोषित नहीं किया गया तो जमीन चली जाएगी। ये गुहार है एक ऐसे इंसान की जो तंग आ गया है उन सरकारी मुलाजिमों की मिलीभगत से जो सैकड़ों मृतकों के खातों में पेंशन भेजकर सरकारी पैसा हड़प रहे हैं। वहीं जमीन हड़पने की नीयत से उन्होंने इस जिंदा व्यक्ति के साथ कुछ ऐसा किया है जिसके बारे में जानकर आप दंग रह जाएंगे।
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जी हां, इस शख्स की इन सरकारी बाबुओ ने कागजों में मृत घोषित कर दिया है। मामला देवरिया जिले का है। इस मामले से पर्दा तब उठा जब यहां डीएम के निर्देश पर पेंशनभोगियों की जांच हुई। पता चला यहां ढाई हजार से भी ज्यादा मृतक और अपात्र लोगों को पेंशन दी जा रही थी। जबकि सलेमपुर तहसील में सरकारी अभिलेखों में मृत घोषित कर दिया गया एक बुजुर्ग खुद के जिंदा होने की गुहार लगाता हुआ अफसरों के दफ्तरों के चक्कर काट रहा है।
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इस बुजुर्ग की गुहार की गूंज जब ऊपर पहुंची तो बेईमान अफसरों की कुर्सियां हिल गई क्योंकि डीएम ने जांच के आदेश जो दे डाले थे। जांच में सामने आया कई बरस पहले मर चुके 1807 लोगों को समाज कल्याण विभाग लंबे समय से पेंशन देता आ रहा है। फिलहाल मृतकों को दी जा रही पेंशन बंद कर दी गई है। इसके अलावा 852 अन्य अपात्रों को दी जा रही पेंशन भी बंद की गई। प्रशासन अब इस रकम की रिकवरी का प्रयास कर रहा है।
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इस मामले में शासन को भी सूचना भेज दी गई है। जिलाधिकारी ने दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की बात कही है। इसके अलावा सलेमपुर ब्लॉक के पड़री झिल्लीपार गांव में भी 12 मृतकों के खाते में वृद्धा पेंशन जाने की शिकायत डीएम से हुई थी। समाज कल्याण अधिकारी इसकी जांच कर रहे हैं।
देखो साहब, मैं जिंदा हूं
साहब, मै जिंदा हूं पर छह माह पहले सरकारी दस्तावेजों में मुझे मार दिया गया। गांव के सचिव से लेकर बीडीओ के दफ्तर तक चक्कर काट कर खुद के जिंदा होने का सुबूत देकर थक चुका हूं लेकिन सुनवाई नहीं हो रही है। कुछ लोगों की नजर मेरी जमीन पर है। यदि जिंदा घोषित नहीं किया गया तो जमीन चली जाएगी।
यह कहकर 61 वर्षीय रामदेव एसडीएम के सामने फफक कर रो पड़े। इस पर एसडीएम ने तहसीलदार को तुरंत जांच कर रिपोर्ट देने के निर्देश दे दिए। नकटापार गांव के रामदेव के दो विवाहित बेटियां हैं। वह दो साल से बड़ी बेटी के घर महराजगंज में रहते हैं। छह माह पहले उन्होंने गांव के एक व्यक्ति से अपनी जमीन बेचने की बात की, तब पता चला कि कुटुम्ब रजिस्टर में उन्हें15 अगस्त-2017 को मृत घोषित कर दिया गया है।