क्या यह उस दौर का आगाज है जहां रोबोट इंसान की जगह ले लेंगे और आगे चलकर इंसान को अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष करना होगा..? रोबोट, आज इंसानों का हर काम कर ले रहे हैं फिर चाहे वह किसी फैक्ट्री में उत्पाद निर्माण से जुड़ा कार्य हो या घर में किसी ग्रहणी द्वारा किया जाने वाला काम। याद कीजिए उस दौर को जब इंसान की जिंदगी में मशीनी इंकलाब की शुरुआत हुई थी। तब यह कहा गया कि मशीने इंसान के हर काम को आसान बना देगी। लेकिन क्या वास्तव में ऐसा है..?
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तुलना करें तो आज इंसानों की अपेक्षा जुराबों की जोड़ियां तलाशकर उन्हें सहेजकर रखने का मुश्किल काम करने में भी रोबोट ज्यादा माहिर है। वहीं ऐसी खबरें भी सामने आती रही हैं जहां चीन की कंपनी ऐसे कारखाने लगाने का दावा करती हैं जिनमें रोबोट काम करेंगे। यह पांच लाख कामगारों की जगह लेंगे। तो क्या वाकयी रोबोट एक दिन इंसानों की जगह ले लेंगे? इस बहस के निष्कर्ष पर पहुंच पाना बेहद मुश्किल है। उधर आविष्कारों का यह सिलसिला लगातार जारी है।
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इसी कड़ी में वैज्ञानिकों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के साथ मिलकर एक ऐसा रोबोट विकसित किया है जो लोगों को उनके कपड़े पहनने व तैयार होने में मदद करेगा। इसके साथ ही वह घायल व दिव्यांग लोगों की सहायता भी करेगा। ‘पीआर2’ नाम की इस मशीन ने एक दिन में तकरीबन 11,000 बार मानव के कृत्रिम ढाचे को कपड़े पहनाना सिखाया। रोबोट द्वारा किए गए प्रयासों में कई विफल रहे जबकि कुछ में उसने शानदार तरीके से अपने काम को कर दिखाया। इस दौरान उसने मानव कृत्रिम ढांचे के हाथ और कोहनी को बहुत ही जटिलता से पकड़ा हुआ था।
अमेरिका में जॉर्जिया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के पीएचडी छात्र जैकोरी एरिक्सन ने कहा कि लोग अकसर नए एक्सपेरिमेंट करते हैं और कई बार बड़ी गलतियां करके सीखते भी हैं। ऐसे ही हमने पीआर2 को भी एक मौका दिया है। एरिक्सन ने कहा, ‘एक इंसान का हजारों परीक्षण करना कभी-कभी खतरनाक होता है, उसके लिए ये सब अकेले कर पाना संभव नहीं हो पाता। लेकिन रोबोट ने सिर्फ एक दिन में मानव के कपड़े पहनने के तरीके को देखकर उसे अच्छे से सीख लिया है। वह जल्द ही कपड़े पहनने के अलग-अलग तरीकों को भी सीख जाएगा।’