फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

15 साल से एक कुएं के अंदर रह रही हैं मां-बेटी, वजह झकझोर कर रख देने वाली

Tue, 01 May 2018 10:07 AM IST
फीचर डेस्क, अमर उजाला
विज्ञापन
1 of 4
mother and daughter
उत्तर प्रदेश के बांदा जिले की एक मां और बेटी की यह कहानी बड़ी संजिदा है। जिले का नसेनी गांव आज इनकी कहानी बयां कर रहा है। 15 साल पहले इसकी शुरुआत होती है जब इस महिला के पति की मौत हो जाती है। पति की मौत के बाद ससुराल वालों ने उसे घर से निकाल दिया था। तब उसकी बेटी की उम्र महज छह महीने थी। बेसहारा महिला एक नन्ही जान के साथ अपने हक के लिए कहां-कहां नहीं भटकी। लेकिन उसकी फरियाद सुनने वाला कोई न था। सिर ढकने के लिए जब कोई छत न मिली तो इस महिला ने गांव के ही एक कुंए में शरण ले ली। इस बात को 15 साल गुजर चुके हैं और यह महिला अब भी यहीं रह रही है।  
विज्ञापन

2 of 4
mother
'कुए' को आशियाना बनाकर रहने वाली यह विधवा दलित महिला 15 सालों से अपनी बेटी के साथ यहीं रह रही है। इस कारण गांव के ग्रामीण उसे अब 'कबूतरी' नाम से पुकारने लगे हैं। यह हाल तब है जब हाल ही में यूपी की योगी सरकार ने प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना के अंतर्गत गरीबों को घर देने में देश में खुद को सबसे आगे बताया। लेकिन, नरैनी तहसील क्षेत्र का नसेनी गांव कुछ और ही हकीकत बयां कर रहा है। मूलरूप से मध्य प्रदेश के अजयगढ़ संभाग के पांडेपुरवा की रहने वाली दलित महिला छोटी के पति की मौत के बाद उसके ससुरालीजनों ने उसे घर से निकाल दिया था। उसने अपनी छह माह की बेटी के साथ नरैनी तहसील के नसेनी गांव में शरण ली और एक कुंए को घर बनाकर रहने लगी। उसकी बेटी रोशनी अब 15 साल की हो गई है। उसे सरकार से आधार कार्ड भी मिला है, जिसमें पता 'कुआं वाला घर' लिखा है। 

 
विज्ञापन

3 of 4
mother and daughter
छोटी को कुछ साल पहले आवासीय भूखंड का पट्टे पर दिया गया था, लेकिन यह भूखंड कब्रिस्तान के बिल्कुल बगल में होने की वजह से वह वहां घर नहीं बना सकी। ग्राम प्रधान से लेकर अधिकारियों की चौखट तक फरियाद लेकर पहुंची लेकिन कोई हल न निकला। ऐसे में उसने यह कुआं ही आशियाना बना लिया। गौरतलब है कि कुएं में रहने की वजह से ग्रामीण छोटी को अब 'कबूतरी' कहकर पुकारने लगे हैं। उसकी बेटी रोशनी पढ़ाई भी कर रही है, उसकी किताबें और बस्ता भी कुआं वाले घर में रखे हुए हैं। 

 
विज्ञापन

4 of 4
mother and daughter
इसी में घर-गृहस्थी का पूरा सामान भी है। यह महिला दो वक्त की रोटी का इंतजाम मेहनत-मजदूरी से करती है। जिलाधिकारी कहते हैं उन्हें इस महिला के बारे कोई सूचना ही नहीं थी। अब पता चला है तो अधिकारियों की टीम भेज कर जांच कराउंगा और महिला की हर संभव मदद करूंगा। 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें