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बिछड़े भाई-बहन की तरह मिले दुनिया के सबसे बौने बच्चे

Sun, 10 Apr 2016 11:13 AM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, नई दिल्ली
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- फोटो : daily mail
एक मंच पर जब दुनिया के सबसे छोटे कद के लोग जमा हुए तो नजारा कुछ ऐसा था। वॉकिंग विद जायंट्स फाउंडेशन द्वारा इंग्लैंड के लिवरपूल में ये आयोजिन किया गया जिसमें दुनिया भर से प्रीमॉर्डियल ड्वार्फिज्म यानी बौनेपन से ग्रसित लोगों को बुलाया गया था।
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खास आयोजन में पहुंचे बौनेपन से ग्रसित बच्चे

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- फोटो : daily mail
कुछ के लिए ये बहुत भावुक क्षण था क्योंकि उन्होंने अपने अलावा पहले बार किसी और को भी ऐसी स्थिति में देखा था। इस आयोजन में ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, रूस, कोलंबिया जैसे देशों से लोग पहुंचे। अभिभावकों के लिए सुनहरा मौका था क्योंकि लोग अपने बच्चों का वहां मौजूद डॉक्टरों से इलाज करा पाए और दूसरों से बात कर के जानकारी हालिस कर पाए।
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खास आयोजन में पहुंचे बौनेपन से ग्रसित बच्चे

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ऑस्ट्रेलिया से अपने 15 साल के बेटे लियो के साथ पहुंचीं एक महिला पॉलीन ने बताया कि जैसे ही लियो ने दूसरे बच्चों को देखा तो ऐसा खुश हुआ मानो बिछड़े हुए भाई-बहन मिल गए हों। उन्होंने बताया कि ऐसे आयोजनों में आकर उन्हें दूसरे अभिभावकों से मिल कर और बात कर के कई नई जानकारियां मिलती हैं।

खास आयोजन में पहुंचे बौनेपन से ग्रसित बच्चे

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रॉबर्ट और ज्यूडिथ वैन जेर लिंडन अपनी चार साल की बेटी एमा को नीदरलैंड से लेकर आए। रॉबर्ट ने बताया,'' हम इंटरनेट पर कुछ खोज रहे थे कि इस ग्रुप के बारे में पता चला। हम एमा को डॉक्टरों को दिखाएंगे, हम डरे हुए हैं लेकिन इससे हमें मदद भी मिल रही है। दूसरे बच्चों को देख कर पता चलेगा कि हम किस स्थिति में हैं।''  
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खास आयोजन में पहुंचे बौनेपन से ग्रसित बच्चे

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प्रीमॉर्डियल ड्वार्फिज्म ऐसी बीमारी है जिसमें लोगों का कद बहुत छोटा होता है लेकिन उनकी हड्डियां और दूसरे अंग उसी कद के मुताबिक होते हैं। इस बीमारी से ग्रसित लोगों को चीजें सीखने में दिक्कत होती है, दिल की बीमारियां होती हैं। जबकि दूसरे तरह के बौनेपन में ऐसा नहीं होता।
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खास आयोजन में पहुंचे बौनेपन से ग्रसित बच्चे

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इससे पहले कई माता-पिताओं और डॉक्टरों को इलाज के लिए 25 साल पुराने रीसर्च पेपर पर निर्भर रहना पड़ता था। इस आयोजन की शुरुआत करने वाले सू और जॉन कॉनर्टी इसे 9 साल से चला रहे हैं। उन्होंने इसकी शुरुआत इसलिए की क्योंकि वे खुद भी ऐसी स्थिति को देख चुके हैं। उन्होंने इसकी शुरुआत तब की जब उनके बेटे एलेक्स में इस बीमारी की पहचान हुई।
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खास आयोजन में पहुंचे बौनेपन से ग्रसित बच्चे

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जब वो छोटा था तब सू और जॉन दूर तक ऐसे ही आयोजनों का हिस्सा बनने जाते थे ताकि जानकारी जुटा सकें। सू बताती हैं कि जब एलेक्स में इस बीमारी का पता चला तो वे लोग बिलकुल अकेले पड़ गए थे। हर वक्त इंटरनेट पर चीजें ढूंढते रहते थे। दूसरे परिवारों से बात कर के थोड़ा आराम मिला। अब वे दूसरो के लिए ऐसे आयोजन करते हैं ताकि वे परिवार भी अपनी परेशानियां कम कर सकें।
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