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इस 4 साल के बच्चे की खौफनाक हकीकत जान चौंके जज, सुना दी उम्रकैद की सजा

Tue, 10 Apr 2018 09:22 AM IST
फीचर डेस्क, अमर उजाला
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Mansour Qurani Ali
दोस्तों, क्या आपने कभी किसी 4 साल के छोटे बच्चे को उम्र कैद की सजा सुनाए जाने के मामले के बारे में सुना है..? शायद नहीं। इस बारे में सुनकर ही आपको ताज्जुब हो रहा होगा लेकिन यह हकीकत है कि दुनिया में एक कोर्ट ऐसी भी है जिसने एक 4 साल के बालक को उम्रकैद की सजा सुना दी।
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egypt court
जी हां, यह कहानी है, एक 4 साल के मासूम बच्चे मंसूर कुरानी अली की। आपको यकीन करना मुश्किल हो जाएगा कि महज चार साल के बच्चे पर ऐसे संगीन अपराधों के इल्जाम लगाए गए जिसे दुनिया की शायद ही कोई और अदालत मान सके। इस एक कोर्ट ने न केवल उसे अपराधों के लिए दोषी ठहराया बल्कि उसे उम्र कैद की सजा भी सुनाई। आप सोच रहे होंगे कि भला इतनी कठोर कौनसी अदालत हो सकती है भला..? 
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egypt people protest
जी हां, यह मामला मिस्र का है। यहां एक कोर्ट ने बच्चे को 4 लोगों की हत्या करने और 8 लोगों को जान से मारने की कोशिश करने व पुलिस को धमकाने के जुर्म में यह सजा सुनाई। जब ये मामला देशवासियों की नजर में आया तो इस फैसले का पुरजोर विरोध किया गया।

 

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egypt riots
लोगों ने सड़कों से लेकर सोशल मीडिया तक कोर्ट के फैसले की कड़ी आलोचना की। सिर्फ इतना ही नहीं, इस मामले पर तमाम बड़े एक्सपर्ट ने भी अपनी राय प्रस्तुत की। इसके बावजूद अदालत  एक साल तक फैसले से टस से मस नहीं हुई।
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Mansour Qurani Ali
जब यह मुद्दा विश्वव्यापी स्तर पर उठाया गया और मिस्र के कानून की निंदा शुरू हुई तब जाकर कोर्ट ने इस ओर अपना ध्यानाकर्षित किया। अदालत ने दोबारा जांच के आदेश दिए। इसके बाद जब मामले का नया निचोड़ निकलकर सामने आया वह बेहद चौंकाने वाला था। दरअसल, जिन अपराधों के लिए मंसूर नामक इस बालक को 1 साल तक सलाखों के पीछे रखा गया, मालूम चला कि वह अपराध उसने किए ही नहीं थे।
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egypt protest
सच तो यह था कि जो आरोप मंसूर पर लगाए गए थे उनकी जांच तक नहीं की गई थी और बिना जांच के ही कोर्ट ने सजा का फरमान सुना दिया। जी हां, दोबारा हुई जांच में मंसूर सभी आरोपों से मुक्त कर दिया गया। मिस्र के अधिकारियों ने स्वीकार किया कि अदालत ने चार वर्षीय इस बच्चे को हत्या के लिए उम्रकैद की सजा सुनाकर भारी भूल की है।
 
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egypt riots
गौरतलब हो मंसूर को मिस्र की कोर्ट ने 2014 के दंगो में भाग लेने के लिए 115 अन्य आरोपियों के साथ दोषी पाया था। इसके लिए उसे एक साल की बेवजह सजा काटनी पड़ी। बाद में इस गलत फैसले के लिए कोर्ट ने मंसूर के पिता से माफी भी मांगी। 

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