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9 साल की मासूम से हुआ था रेप, 17 साल बाद वो बच्ची बनी 'ज्वाला', रेपिस्ट को घसीटकर जेल में डाला

Sat, 23 Jun 2018 08:39 AM IST
बीबीसी हिंदी
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d - फोटो : getty images
नौ साल की वो बच्ची बहुत बातूनी थी। उसके पास कई गुड़िया थीं और वो अपनी पक्की सहेली के साथ 'घर-घर' खेला करती थी। उसे साइकिल चलाना बहुत पसंद था। टीवी के अलावा उसके पास कोई इलेक्ट्रॉनिक गैजेट नहीं था। उस फोटोग्राफर की उम्र 39 साल थी। वो शादीशुदा था। प्रकृति से उसे खास लगाव था। खूब घूमता-फिरता था। समुद्र तटों, नदियों और घुमक्कड़ी के बारे में अपनी बतकही से वह आसानी से लोगों का भरोसा जीत लेता था। तबाता (बदला हुआ नाम) की उस फोटोग्राफर से पहली मुलाकात साल 2002 की गर्मियों में हुई। वह तबाता के माता-पिता का दोस्त था। उसने दो साल तक तबाता से बलात्कार किया।
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आखिरी बार यौन शोषण के 12 साल बाद दोनों एक बार फिर मिले। इस बार तबाता के एक हाथ में बंदूक थी। उसने फोटोग्राफर की बांह कसकर पकड़ी और हथकड़ियां लगाकर उसे जेल में ले गई। उसे जेल में बंद करके बाहर से ताला लगाया और फिर राहत की एक लंबी सांस ली जैसे कोई सिलसिला खत्म कर दिया हो।

तबाता अब 26 साल की हैं और पुलिस अधिकारी बन गई हैं। वह दक्षिणी ब्राजील के सेंता कैतेरीना प्रांत में तैनात हैं। 21 दिसंबर 2016 का वो दिन उनके जेहन में ताजा है। तबाता ने उस शख्स को सलाखों के पीछे पहुंचा दिया जिसने बचपन में उनका कई बार यौन शोषण किया था।

पहली बार किसी पत्रकार से बात करते हुए उन्होंने बीबीसी ब्राजील को अपनी कहानी बताई। तबाता कहती हैं कि उन्होंने बोलने का फैसला इसलिए किया ताकि वो दूसरी महिलाओं को भी ऐसा करने के लिए प्रोत्साहित कर सकें।
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camping
नदी किनारे कैंपिंग से शुरू हुआ शोषण
तबाता के पिता की फोटोग्राफर से जब पहचान हुई तो वह नौ साल की थीं। कुछ ही समय में फोटोग्राफर उनका पारिवारिक मित्र बन गया। गर्मियों में दोनों परिवारों ने नदी किनारे कैंपिंग की योजना बनाई और हर हफ्ते कैंपिंग के लिए जाने लगे।

तबाता उस अच्छे वक्त को याद करती हैं जब वो नदी में नहाया करती थीं और खूब मजे करती थीं। दोनों परिवार कार से जाया करते थे, जंगलों के ऊबड़-खाबड़ रास्तों से गुजरते हुए प्रकृति का आनंद लेते थे और खुले आसमान के नीचे ठंडी हवा में सोते थे।

कैंपिग का सिलसिला शुरू हुए कुछ ही हफ्ते हुए थे कि वो फोटोग्राफर तबाता का शोषण करने लगा। वो कहती हैं, "मुझे ये सब परेशान कर रहा था, लेकिन मुझे तब नहीं पता था कि जो मेरे साथ हो रहा है, वह अपराध है।" "मैंने अपने परिवार को उस वक्त कुछ नहीं बताया, लेकिन आज सोचती हूं कि मैंने ऐसा क्यों किया।" तबाता की एक आठ साल की सौतेली बहन भी थी, लेकिन वो कैंपिंग के लिए उनके साथ नहीं आती थी। "वो मेरे पिता के ज्यादा करीब नहीं थी क्योंकि वो उनकी सौतेली बेटी थी। वो घर पर रहकर ही टीवी देखती थी या पढ़ाई करती थी।"

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'कहीं पिता उसकी हत्या न कर दें'
तबाता के मुताबिक, फोटोग्राफर ने उनके कमजोर होने, कैम्प के अकेलेपन और पेड़ों के बीच अंधेरे का फायदा उठाया। वो बताती हैं, "एक बार मैं कैंपिंग के दौरान पानी लेने गई थी तो रास्ते में उसने मेरा शोषण किया। मैं मुश्किल से हाथ छुड़ाकर वहां से भागी। मेरे माता-पिता ने पूछा कि तुम उससे पहले क्यों आ गईं? उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि उनका भरोसेमंद इंसान उनकी बेटी के साथ ये सब कर सकता है।"

जब शोषण की घटनाएं अकसर होने लगीं तो तबाता के लिए बर्दाश्त करना मुश्किल हो गया। वह अपने पिता को सब कुछ बता देना चाहती थीं। वो कहती हैं, "मेरे पिता हमेशा तनाव में रहते थे और मुझे डर था कि मेरे सच बताने पर कहीं वो उस फोटोग्राफर की हत्या न कर दें। फिर उन्हें जेल हो जाती। हजारों बातें चल रहीं थीं मेरे दिमाग में। एक डर ये भी था कि मेरे माता-पिता मेरा यकीन करेंगे या नहीं।"

'मां को बस बताने ही वाली थी, लेकिन'
फोटोग्राफर अकसर उनके घर आने लगा, ये देखने कि तबाता कब अकेली रहती हैं। उसने देखा कि तबाता की बहन पढ़ने में व्यस्त रहती है और उनकी मां रात को काम करती है। वो ये भी जानता था रात में उनके पिता कब फुटबॉल खेलते हैं, वो उस वक्त का फायदा उठाता और तबाता का यौन शोषण करता। "वो कहता था, बस थोड़ा-सा, बस थोड़ा-सा'. "वो कभी मुझे मारता नहीं था, वो मुझे कसकर पकड़ लेता था।"
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वो ढाई साल तक तबाता का यौन शोषण करता रहा
ताबता कहती हैं कि 11 साल की उम्र तक मुझे समझ आने लगा कि वो मेरे साथ यौन अपराध कर रहा है। मैं उसका विरोध करने लगी, चिल्लाने लगी, लेकिन इसका कोई फायदा नहीं हुआ। एक दिन उसने अपनी मां को सबकुछ बताने की ठानी, लेकिन तभी पता चला कि उसकी मां को बायपोलर डिसऑर्डर (एक मानसिक रोग) हो गया है। तबाता ने उन्हें कुछ ना बताने का फैसला किया।

सौतेली बहन को बताया
उसी वक्त तबाता को एक और चौंकाने वाली खबर मिली। उसके पिता का फोटोग्राफर की पत्नी के साथ अफेयर चल रहा था। जब इस बात का पता दोनों परिवारों को चला तो दोस्ती खत्म हो गई और शोषण का सिलसिला भी। तबाता ने अपनी पक्की सहेली को सब कुछ बताया और उससे इसे राज बनाए रखने का वायदा लिया। वो मुश्किल वक्त था। तबाता को शारीरिक और मानसिक रूप से बीमार मां को संभालना था। 

वह अपनी बहन से भी बात करना नहीं चाहती थी क्योंकि दोनों के बीच बहुत अच्छे संबंध नहीं थे। 19 दिसंबर 2017 यानी एक साल बाद फोटोग्राफर को रिहा कर दिया गया। जेल में अच्छे बर्ताव की वजह से उसकी सजा कम कर दी गई थी। अब वो आजाद है और तबाता इससे असंतुष्ट हैं, लेकिन उन्हें लगता है कि जिसने उनका बचपन में दो साल तक बलात्कार किया, उसे इतने कम समय में कैसे छोड़ दिया गया।
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बच्चों के खिलाफ यौन अपराध बढ़े
मानसिक नुकसान
तबाता बचपन में बहुत घुलने-मिलने वाली बच्ची थी, लेकिन उनके साथ हुए शोषण ने उनके आगे की जिंदगी को बदलकर रख दिया। वो बताती हैं, "मैं लोगों से ज्यादा बात करने से बचने लगी थी। मुझे डर लगता था। मुझे अपने शरीर पर शर्म आती थी। जब मेरे दोस्त सेक्स और बच्चे पैदा करने के बारे में बात करते थे तो मैं असहज हो जाती थी, क्योंकि मैंने हमेशा सेक्स का एक गंदा रूप देखा था।"

पुलिस अफसर तबाता यौन हिंसा के केस नहीं लेती थीं क्योंकि हर रेप की कहानी उनके जख्म ताजा कर देती थी, लेकिन तबाता का मानना है कि उनकी कहानी दूसरे परिवारों के लिए एक चेतावनी है। "मैं मांओं से कहूंगी कि अपने बच्चों से बात करें और उन्हें सिखाएं कि कुछ भी गलत होने पर बताएं। बच्चों को अहसास कराएं कि वो उन पर भरोसा करते हैं।"

"मैं यौन शोषण की दूसरी पीड़िताओं से कहना चाहती हूं कि वो अपने साथ हुए गलत बर्ताव के लिए खुद को दोषी ना मानें।" "मैं हमेशा कहती हूं कि पीड़िता पर दोष नहीं मढ़ा जाना चाहिए। जो कुछ होता है उसमें पीड़िता के कपड़ों का कोई दोष नहीं होता, बल्कि यौन शोषण करने वाला ही दिमागी तौर पर बीमार होता है।"
 
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