फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

आखिर क्यों महिलाओं को श्मशान घाट जाने से किया जाता है मना, सोच भी नहीं सकेंगे आप

Wed, 25 Jul 2018 02:54 PM IST
फीचर डेस्क, अमर उजाला
विज्ञापन
1 of 6
demo
हिन्दू धर्म के मुताबिक कई ऐसे काम हैं जो केवल पुरुष ही निभा सकते हैं महिलाऐं नहीं। ऐसा ही कुछ होता है शवयात्रा का नजारा। आपने कई लोगों को शवयात्रा में जाते हुए देखा होगा। फिर तो आपने एक बात जरूर नोटिस की होगी... शव यात्रा में केवल पुरुषों की ही मौजूदगी होती हैं लेकिन महिलाऐं नदारद रहती हैं। ऐसा क्यों होता है, क्या आप इस बारे में जानते हैं..? 
विज्ञापन

2 of 6
Cremation grounds
आपको ये बात शायद गले न उतरे लेकिन ये हकीकत है कि प्राचीन हिंदू शास्त्रों में महिलाओं को बेहद आजादी दी गई है। इन ग्रंथों में कहीं भी नहीं लिखा है कि महिलाओं को श्मशान घाट नहीं जाना चाहिए या मृतक परिजन का अंतिम संस्कार नहीं करना चाहिए। इसके बावजूद महिलाओं को अंतिम संस्कार के समय श्मशान में जाने से रोका जाता है। इसके पीछे कुछ विशेष तर्क दिए जाते हैं। इनके बारे में जानकर आप भी हैरान रह जाएंगे। 

 
विज्ञापन

3 of 6
women crying
दरअसल, समाज में महिलाओं को कोमल ह्रदय का माना जाता है। कहा जाता है कि वे किसी भी बात पर सहज ही डर सकती है। असल में अंतिम संस्कार के बाद मृत शरीर अकड़ने लगता है जिसकी वजह से कई बार अजीबोगरीब आवाजें आने लगती हैं। इस कारण महिलाओं को डर लग सकता है। 

4 of 6
Cremation grounds
श्मशान में मृतक का अंतिम संस्कार करते समय शोक का माहौल होता है। उस समय लोग रोते हैं जिसका असल महिलाओं और छोटे बच्चों के मन पर पड़ सकता है। इसलिए उन्हें श्मशान घाट जानें नहीं दिया जाता। समाज में प्रचलित इस मान्यता के कारण महिलाओं और छोटे बच्चों का श्मशान में जाना वर्जित किया गया है।

 
विज्ञापन

5 of 6
Cremation grounds
मान्यता यह भी है कि किसी के मरने से घर अशुद्ध हो जाता है। इसीलिए जब मृतक के शव को अंतिम संस्कार के लिए ले जाया जाता है तो घर की महिलाओं को यह जिम्मेदारी दी जाती है कि वह पीछे से घर को संभाले और उसकी धार्मिक रूप सफाई करें। यदि महिलाएं श्मशान जाएंगी तो यह क्रिया नहीं हो पाएगी। 

 
विज्ञापन
विज्ञापन

6 of 6
Cremation grounds
ये है साइंटिफिक कारण
जब शव जलाया जाता है तो मृतक के शरीर से निकले किटाणु आसपास मौजूद लोगों के शरीर पर चले जाते हैं। इसलिए शमशान से वापस लौटने के बाद सबसे पहले स्नान किया जाता है। माना जाता है कि आदमियों के बाल छोटे-छोटे होते हैं इसलिए ये किटाणु उनके शरीर से स्नान के दौरान आसानी से निकल जाते हैं लेकिन महिलाओं के बाल लंबे होते हैं। इसलिए उनके शरीर पर ये किटाणु स्नान के बाद भी रह जाते हैं।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें