फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अब सिर्फ एक मैसेज काफी है ये पता लगाने के लिए कि दवा असली है या नकली

Mon, 22 Oct 2018 09:40 AM IST
अनिल पांडेय फीचर टीम, अमर उजाला
विज्ञापन
1 of 4
Medicine
आपने जो दवा खरीदी है वह असली है या नकली, इसका पता आप कैसे लगा सकते हैं, क्या आपने कभी इस बारे में सोचा है..?  दरअसल, भोलाभाला आम ग्राहक नकली दवाओं के चक्कर में बड़ी ही आसानी से फंस जाता है। उन्हें पता ही नहीं चल पाता कि असली दवाओं की पहचान क्या है। ऐसे में दवाई की काले कारोबारी ग्राहकों के साथ खूब धोखाधड़ी करते हैं। अगर आप किसी मेडिकल स्टोर से दवा खरीद रहे हैं और आपको दुकानदारी द्वारा दी गई किसी भी दवा पर संशय है तो आप दवा के बारे में आसानी से पता लगते सकते हैं।  

 
विज्ञापन

2 of 4
medicine
जी हां, इसके लिए आपके काम आएगा एक व्हाट्स एप मैसेज या एसएमएस। है न कमाल की बात..? मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो ऐसा करने से भारतीय बाजार से टॉप 300 ड्रग ब्रांड्स की नकली दवाएं मार्केट से बाहर करने में मदद मिलेगी। जी हां, ऐसा संभव है 'ट्रेस एंड ट्रैक' के जरिए। दवा कंपनियां इस पहल से स्वैछिक तौर पर जुड़ सकती हैं। इसके जरिए बाजार में उनके नाम पर बिक रही नकली दवाओं को आसानी से पकड़ा जा सकेगा । इस प्रक्रिया के तहत  टॉप 300 दवा ब्रांड पर 14 डिजिट का यूनिक नंबर प्रिंट किया जाएगा। यही प्रिंट असली दवा की पहचान कराता  है। 

 
विज्ञापन

3 of 4
medicine shimla
आपकी जानकारी के लिए बता दें ये नंबर दवा की हर स्ट्रिप और बॉटल पर अलग होगा। इसके अलावा लेबल पर कंपनी का मोबाइल नंबर भी होगा। बॉटल या दवा के पत्ते पर प्रिंटेड 14 अंकों के कोड को कंपनी की तरफ से उपलब्ध कराये गए मोबाइल नंबर पर मैसेज कर सकते हैं। 14 अंक के नंबर को मैसेज करते ही दवा बनाने वाली कंपनी का नाम, पता, बैच नंबर, मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपायरी डेट जैसे डिटेल्स आपके पास पहुंच जाएंगे। है न आसाना तरीका। 

 
विज्ञापन

4 of 4
medicine
मालूम हो कि 2016 में हुए एक सर्वे के मुताबिक, भारत में बिकने वाली लगभग 3 फीसदी दवाओं की गुणवत्ता अच्छी नहीं है। वहीं, लगभग 0.023 फीसदी दवाएं संदेहास्पद या फर्जी हैं। देखना यह होगा कि इसकी प्रोग्रामिंग किस तरह की जाती है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें