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बड़ी फेमस है 'सिगरेट बाबा की मजार' खूबी जानकर खा जाएंगे चक्कर

Fri, 12 Jan 2018 09:52 AM IST
बिजार डेस्क, अमर उजाला
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cigarette smoking saint
भारतीय लोगों में भगवान के नाम पर कितनी गहरी आस्था है इसके बारे में पूरा जग जानता है। यहां आस्था से किसी को भी भगवान का दर्जा दिया जा सकता है। ऐसी ही आस्था का प्रतीक यहां सामने आया है।


ये जीती-जागती मिसाल लखनऊ के मूसा बाग में है। जी हां, यहां एक बड़ी ही फेमस मजार है जिसे 'सिगरेट बाबा' के नाम से जाना जाता है। कहते हैं कि यहां आने वाला जो कोई इंसान मजार पर सिगरेट चढ़ाता है, उसकी सारी मुरादें पूरी होती है।
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cigarette smoking saint
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक यह मजार एक अंग्रेज सैनिक के नाम पर बनी है। इस मजार की सबसे बड़ी खास बात ये है कि यह हिन्दु और मुसलमान दोनों के लिए ही आस्था का बड़ा केंद्र है। 

यही वजह है कि कैप्टेन वेल्स उर्फ कप्तान साहब उर्फ सिगरेट बाबा के नाम पर बनी इस मजार पर दूर-दूर से लोग आते हैं। इन्ही भक्तों ने अपनी आस्था से कैप्टेन वेल्स को एक सन्त का दर्जा दे दिया है।
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dargah
खास गुरुवार को यहां मजमा लगता है। मजार पर सिगरेट चढ़ाने के पीछे तर्क ये दिया जाता है कि कैप्टन वेल्स को सिगरेट का बेहद शौक था, इसलिए यहां आने वाले लोग मजार पर प्रसाद की सिगरेट चढ़ाते है।

उनकी मान्यता है की सिगरेट चढ़ाने से बाबा प्रसन्न होंगे और उनकी मुरादे पूरी करेंगे। मजार पर जाने के लिए आपको लखनऊ शहर से बाहर हरदोई रोड से कुछ दूरी पर मूसाबाग के खंडहर नजर आएंगे। इन्हीं खंडहारों के पीछे स्थित है हजरत सैयद इमाम अली शाह की दरगाह।

 
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cigarett smoking saint
इसी दरगाह से थोड़ा आगे खेतों के बीच यह मजार है। गौरतलब हो 'मूसाबाग' का निर्माण अवध के नवाब आसिफुद्दौला ने 1775 में अपनी आरामगाह के रूप मे करवाया था। एक किवदंती है की नवाब साहब ने  यहां पर एक चूहे को मारा था, बस तभी से इसका नाम मूसबाग पड़ गया। 

लेकिन सन् 1857 की लड़ाई में मूसबाग की इमारतें अंग्रेज सैनिकों और भारतीय स्वंत्रता सेनानियों के बीच चली गोलाबारी में तहस-नहस हो गई। यही वजह है कि आज यहां केवल इनके खंडहर ही शेष रह गए हैं।
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