फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

किन्नरों की शव यात्रा को रात में निकालने का खुला रहस्य, जूतों से मारकर किया जाता है ये काम

Thu, 05 Jul 2018 02:50 PM IST
फीचर डेस्क, अमर उजाला
विज्ञापन
1 of 4
किन्नरों के बारे में तो हम सबको पता है लेकिन उनके बारे में ऐसी कई बातें हैं जो कोई नहीं जानता। इनकी जिंदगी हम लोगों की तरह सामान्य नहीं होती। इनके जीवन जीने का तरीका और रहन-सहन हमसे बिल्कुल अलग होता है। इन लोगों का अपना एक अलग समाज होता है और ये लोग उसी समाज में रहते हैं। हर समाज की तरह किन्नरों के समाज में भी उनके अपने अलग रिवाज हैं। जन्म से लेकर मरने तक ये अलग अलग नियमों का पालन करते हैं। क्या आपने कभी किसी किन्नर की शव यात्रा देखी है...नहीं देखी होगी क्योंकि ये दिन में शव का अंतिम संस्कार नहीं करते है। जी हां ये बात बिल्कुल सच है।
विज्ञापन

2 of 4
दरअसल किन्नरों की शव यात्रा में कई बड़े राज छिपे हैं। किसी के घर में नई शादी हुई हो या फिर किसी बच्चे का जन्म हुआ हो, वहां किन्नरों को नाचते- गाते नेक मांगते हुए तो आपने जरूर देखा होगा। कुछ पैसे लेकर ये किन्नर आपको ढेर सारा आशीर्वाद देते हैं लेकिन क्या आपको मालूम है कि जब इन किन्नरों मौत होती है तब इनके शव को सभी से छुपा कर रखा जाता है। जहां ज्यादातर शव यात्रा दिन में निकाली जाती है, वहीं किन्नरों की शव यात्रा रात में निकाली जाती है।
विज्ञापन

3 of 4
रात में किन्नरों की शव यात्रा निकालने के पीछे ये कारण है कि कोई इंसान इनकी इस शव यात्रा को न देख सके। मान्यता है कि इस शव यात्रा में इनके समुदाय के अलावा दूसरे समुदाय के किन्नर भी मौजूद नहीं होने चाहिए। किन्नरों की शव यात्रा काफी गुप्त तरीके से की जाती है। किन्नर समाज की सबसे बड़ी विशेषता ये है कि आम लोगों की तरह किसी के मरने पर ये लोग बिल्कुल नहीं रोते। किन्नर समाज में किसी की मौत होने पर ये लोग बिल्कुल भी मातम नहीं मनाते क्योंकि इनका रिवाज है कि मरने से उसे इस नर्क वाले जीवन से छुटकारा मिल गया है।
विज्ञापन

4 of 4
ऐसा इसलिए किया जाता है कि अगले जन्म में उसे भगवान अच्छी जिंदगी दे। ये लोग चाहे जितने भी दुखी हों, किसी अपने के चले जाने से उसकी मौत पर खुशियां ही मनाते हैं। ये लोग इस खुशी में पैसे भी दान में देते हैं। किन्नरों के समाज में किसी की मौत होने पर सबसे अजीब रिवाज ये है कि ये लोग शव को अंतिम संस्कार से पहले जूते-चप्पलों से भी पीटते हैं। कहा जाता है कि ऐसा करने से उस जन्म में किए सारे पापों का प्रायश्चित हो जाता है। वैसे तो किन्नर हिन्दू धर्म को मानते हैं, लेकिन ये लोग शव को जलाते नहीं हैं बल्कि दफनाते हैं।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें